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24 साल बाद तमंचे के आरोप से बरी हुआ रामरतन

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24 साल बाद रामरतन दोषमुक्त
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मुजफ्फरनगर। 24 साल पूर्व तमंचा-कारतूस बरामदगी के आरोप में जेल भेजे गए ग्रामीण को सीजेएम कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। पीड़ित आर्म्स एक्ट के मामले में शुरूआती तीन माह जेल में रहकर जमानत पर बाहर आया था, जिसके बाद से वह लगातार कोर्ट के चक्कर काटता रहा। अब उसे अब इंसाफ मिल पाया है।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव रोहाना खुर्द निवासी रामरतन मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करता है। रामरतन को नवंबर 1996 में शहर कोतवाली पुलिस ने चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया था। तत्कालीन दरोगा सत्येंद्र सिरोही ने उसके पास से तमंचा-एक कारतूस बरामद दिखाते हुए आर्म्स एक्ट में जेल भेज दिया था। पीड़ित के अनुसार जेल जाने के बाद वह तीन माह तक जेल में रहकर जमानत पर बाहर आया। इसके बाद शुरू हुआ उसके कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने का अनवरत सिलसिला, जो लगातार 24 साल तक चलता रहा। रामरतन के आर्म्स एक्ट का यह मुकदमा सीजेएम कोर्ट में चला, जिसमें लंबी सुनवाई हुई। इस दौरान सैकड़ोें बार रामरतन तारीख पर कोर्ट-कचहरी पहुंचा, जिससे उसका काम-धंधा भी प्रभावित हुआ और परिवार पर भी असर पड़ा। हालांकि 24 साल लंबी सुनवाई में शहर कोतवाली पुलिस पीड़ित रामरतन के खिलाफ किसी तरह के पुख्ता सुबूत कोर्ट में पेश नहीं कर पाई, जिसके बाद आखिरकार 24 साल बार सीजेएम कोर्ट ने रामरतन को दोषमुक्त करार देते हुए मुकदमे से बरी कर दिया। 24 साल लंबी इस लड़ाई को जीतने वाले रामरतन का कहना है कि उसे उस समय भी पुलिस द्वारा झूठे इल्जाम में जेल भेजा गया था। वह लगातार फरियाद करता रहा, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस की इस हठधर्मिता के चलते उसे बेकसूर होने के बावजूद तीन माह की जेल काटनी पड़ी और 24 साल तक कोर्ट-कचहरी के धक्के भी खाने पड़े। हालांकि, ईश्वर पर उसे भरोसा था, जो 24 साल बाद अब सही साबित हुआ।
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