एसडी डिग्री की कॉलेज की जमीन पर बनी निजी संस्थाएं हटेंगी
मुजफ्फरनगर। एसडी डिग्री कॉलेज की 22.7 एकड़ और छह एकड़ जमीन एसोसिएशन के नाम करने और दस हजार मीटर जमीन की लीज डीड करने के मामले में शासन ने कार्रवाई का निर्णय लिया है। लीज डीड निरस्त करने के साथ ही इसमें शामिल लोगों पर एफआईआर भी होगी। एसडी डिग्री कॉलेज की जमीन पर बनी संस्थाओं में अब तक हुई आय का ऑडिट लखनऊ में गठित उच्च स्तरीय जांच समिति करेगी। एसडी की प्रबंध समिति पर भी कार्रवाई होगी। सरकारी जमीन पर नक्शा पास करने वाले एमडीए के अधिकारियों और विभिन्न कॉलेजों की अनुमति देने वाले यूनिवर्सिटी के अफसरों पर भी कार्रवाई होगी। किस तरह कार्रवाई की प्रक्रिया अमल में लाई जाए, इसके लिए राज्यपाल के विधि सलाहकार से राय ली गई है।
लखनऊ के लोकभवन में शुक्रवार को एसडी डिग्री कॉलेज की 22.7 एकड़ और छह एकड़ जमीन पर निजी संस्थान खड़े करने को लेकर शासन के उच्चाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में मौजूद शिकायतकर्ता श्रीकांत त्यागी ने फोन पर बताया कि बैठक दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक चली। शिकायतकर्ता ने बताया कि बैठक में यह तय किया गया कि एसडी डिग्री की जमीन का 1954 में जो गजट हुआ था, उसी गजट के हिसाब से ही उपयोग में भूमि लाई जा सकती है। जमीन को एसडी एसोसिएशन के नाम करना गलत प्रक्रिया रही। इसी के साथ दस हजार मीटर जमीन एसोसिएशन को लीज पर देने को अवैधानिक बताया गया। अफसरों ने सर्वसम्मति से लीज डीड निरस्त करने का निर्णय लेने के साथ ही इस प्रक्रिया में शामिल लोगों पर एफआईआर करने की कार्रवाई को मंजूरी दी। कॉलेज की जमीन पर जितनी भी संस्थाएं खड़ी की गई हैं, उन सबको हटाया जाएगा। एसडी डिग्री की जमीन पर जितनी भी संस्थाएं हैं, इनमें अब तक कितनी आय हुई और इस आय का क्या प्रयोग हुआ, इसका ऑडिट लखनऊ में गठित उच्च स्तरीय कमेटी से कराने का निर्णय हुआ। सरकारी जमीन पर यूनिवर्सिटी में अलग-अलग कॉलेजों को किस प्रकार मान्यता दे दी गई, इसमें शामिल अफसरों पर कार्रवाई के लिए राज्यपाल के विधि सलाहकार से राय मांगी गई है। निर्माण की अनुमति देने वाले एमडीए अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। बैठक में यह निर्णय भी हुआ कि एसडी की तत्कालीन और वर्तमान प्रबंध समिति पर कार्रवाई होगी। समिति ने अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करते हुए जमीन की सुरक्षा नहीं की। बैठक में मुख्यमंत्री के तीन सचिव, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, विभिन्न विभागों उच्चाधिकारियों के साथ शिकायतकर्ता श्रीकांत त्यागी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बैठक में लिए गए निर्णयों से शाम के समय मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया।