संत के संदेश पर यहां रुकी थी राष्ट्रपति की सवारी
मुजफ्फरनगर। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वाधीन भारत के शिल्पी थे। शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव के आग्रह पर उन्होंने मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर जनसभा की थी, जो उनके सहज और सरल स्वभाव को दर्शाता है। 1952 में संत के संदेश पर राष्ट्रपति रेलवे स्टेशन पर स्पेशल गाड़ी से उतरे और लोगों से रूबरू हुए थे।
भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज 137वीं जयंती है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी की नीतियों, नेतृत्व और अहिंसात्मक आंदोलन में अग्रणी रहे डॉ. राजेंद्र प्रसाद की यादें और बातें मुजफ्फरनगर से भी जुड़ी हैं। उनका जन्म तीन दिसंबर, 1884 को बिहार के सिवान जनपद के छोटे से गांव जीरादेई में हुआ था। आजादी के उपरांत उन्होंने 12 वर्ष की लंबी अवधि तक देश के राष्ट्रपति का दायित्व संभाला था।
राजेंद्र बाबू ग्रामोत्थान के लिए शिक्षा का उजियारा फैलाने में जुटे वीतराग स्वामी कल्याणदेव की निष्काम सेवा से बेहद प्रभावित थे। शिक्षा ऋषि ने अपने शिष्य वैध जगदीश प्रसाद शर्मा के माध्यम से राष्ट्रपति को शुकतीर्थ पधारने हेतु एक चिट्ठी भेजी, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। प्रोग्राम ये तय हो गया कि हरिद्वार जाते समय वह मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर ही शुकतीर्थ का प्रसाद एवं गंगा जल ग्रहण करेंगे और जिले की जनता से मिलेंगे।
जनवरी, 1952 की बात है, रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर राष्ट्रपति की दिल्ली से आई स्पेशल ट्रेन रुकी। वीतराग संत के आह्वान पर हजारों लोगों की भीड़ राजेंद्र प्रसाद को सुनने स्टेशन पहुंचीं। स्वामी जी के भक्तों लाला जगत प्रकाश, लाला जय प्रकाश, लाला इंद्र प्रकाश आदि ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। प्लेटफार्म पर ही मंच सजा और राष्ट्रपति ने किसानों और मजदूरों को आत्मनिर्भर भारत बनाने की प्रेरणा दी। शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ के संग्रहालय में रखे तत्कालीन राष्ट्रपति के चित्र और पत्रावलियां अतुल्य धरोहर है।
भारत के राष्ट्रपति के रूप में डा. राजेंद्र प्रसाद के स्थापित आदर्श, नैतिक मूल्य और परिपक्व चिंतन राष्ट्र के लिए सदैव प्रासंगिक है। गुरुदेव स्वामी कल्याणदेव के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा थी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीयों में अटूट धैर्य, दृढ़ संकल्प और अदम्य बलिदान की ऊर्जा का संचार किया था।
- स्वामी ओमानंद, पीठाधीश्वर, भागवत पीठ शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ
डॉ. राजेंद्र प्रसाद सुयोग्य साहित्यकार तथा राष्ट्र भाषा हिंदी के प्रबल समर्थक थे। 20 मई, 1962 को दिल्ली के रामलीला मैदान में उनके विदाई समारोह में तत्कालीन प्रधानमंत्री प.जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि भारतीय गणतंत्र के पहले 12 वर्ष ‘राजेंद्र युग’ के रुप में याद किए जाएंगे। - गजेंद्र पाल सिंह, जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय हिंदी परिषद
वर्ष 1952...मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर तत्कालीन राष्ट्रपति डा.राजेंद्र प्रसाद का स्वागत करते जिले क- फोटो : MUZAFFARNAGAR