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Muzaffarnagar News: आलू के दाम धड़ाम, उत्पादकों में छाई मायूसी

Tue, 14 Mar 2023 12:23 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
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चरथावल गोदाम में आलू का स्टॉक
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मुजफ्फरनगर। आलू के दामों में तेजी से आई गिरावट से उत्पादक मायूस है। वहीं कारोबारियों के अरमान धराशायी हो गए हैं।
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थोक कारोबारियों का कहना है गुजरात और पंजाब में बंपर पैदावार से क्षेत्र में आलू के दाम धड़ाम हो गए है। अप्रैल के महीने में उन्हें शीतगृहों में स्टॉक करने में संशय बना है। नई फसल नवंबर में शुरू हुई थी, लेकिन आलू के दाम की रफ्तार तेजी से नीचे आ गई है। आलू के दाम धड़ाम होने से सीजन में किसानों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। किसानों की लागत भी पल्ले नहीं पड़ रही है।
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बारिश कम और बंपर पैदावार वजह
पिछले दिनों में आलू के दामों में अनिश्चितता से आलू का स्टॉक करना जोखिम भरा रहा। किसानों को भारी नुकसान है, लेकिन उनका मुनाफे में कमी आई है। बेहतर सीजन के अरमानों पर मंदी ने पानी फेर दिया। फिलहाल जलालाबाद और थानाभवन से आलू लाकर बेच रहे हैं। संभल का आलू पिछले हफ्ते मंगाना बंद किया है। मंदी में आलू उत्पादकों लागत भी पल्ले नहीं पड़ रही है। तेजी से रेट गिरने से नए आलू का सीजन घाटे का सौदा रहा। कस्बे में रोजाना 400 क्विंटल आलू कस्बों एवं देहात में बिकता है। - शहजाद पूर्व सभासद थोक व्यापारी चरथावल
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मंदी से किसानों का बड़ा नुकसान है। पुराने आलू चिप्सोना को अगले महीने में 350 रुपये प्रति 50 किलो का बैग गोदामों में स्टॉक करेगा। इस बार गुजरात, पंजाब और संभल क्षेत्र में फसल अच्छी है। रेट की अनिश्चितता के कारण इस बार शीतगृह में स्टॉक करने में असमंजस में है। पिछले सीजन के मुकाबले आलू के दाम आधे से कम पर आ गए है। शामली, हापुड़, अलीगढ़ के शीतगृह में बंपर आलू की भरमार है। कहते हैं गुजरात से सबसे ज्यादा आलू आता था। वहां के शीतगृह फूल है। बचा आलू मंदा बिक रहा है। - दिलशाद, गोदाम स्वामी चरथावल

- अच्छी लागत और बड़ी मेहनत से आलू की फसल तैयार की थी कि अच्छे दाम मिलेंगे, लेकिन सब्जी मंडी में फिलहाल आलू के भाव काफी नीचे गिर गए हैं। आलू के दाम गिरने से फसल की लागत भी नहीं मिल सकेगी। - राजीव उर्फ बिन्नू, किसान
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सब्जी मंडी में आलू के दाम गिरने से आलू का स्टॉक फिलहाल घर पर ही लगा दिया गया है धीरे-धीरे गर्मी बढ़ने से कट्टे में आलू गलना शुरू हो गया है। इससे और काफी नुकसान भरना पड़ सकता है। - रामसिंह, किसान।
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कोट...
मुजफ्फरनगर में आलू मात्र 400 हेक्टेयर जमीन में बोया जाता है। स्थानीय उत्पादकों द्वारा कम मात्रा में आलू बाजार में बेचा जाता है। जबकि बाहरी जिलों एवं प्रांतों से आलू की आवक यहां बंपर रहती है। अधिकांश किसान घर के उपयोग के लिए जिले में आलू पैदावार करते है। - अरूण सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
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