भोपा क्षेत्र के ग्राम निरगाजनी में सैकड़ों बीघा आलू की फसल मौसम की मार के चलते नष्ट हो गई। जिससे किसानों की आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। किसानों को फसल बीमा राशि न मिलने तथा बैंक द्वारा कर्ज के नोटिस भेजे जाने से क्षुब्ध महिला किसान ने तो आत्महत्या करने की भी धमकी दी है।
केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया जाता रहा है। इस दावे को लोग उस समय हवा हवाई समझते लगे जब ग्राम निरगाजनी के किसान अपनी बर्बाद हुई सैकड़ों बीघा आलू की फसल के संबंध में जिला कृषि कार्यालय पर पहुंचे। बताया कि उनकी फसल को सरकारी कागजों में आलू की फसल की जगह गन्ना की फसल दर्शाया गया है। इसलिए कोई सरकारी सहायता नहीं की जा सकती।
रूपेश कुमार, दिनेश कुमार व भाकियू नेता अनुज राठी आदि किसानों ने बताया कि उनके क्रेडिट खाते से फसल बीमा की प्रीमियम राशि काटी जा रही है। किंतु आज आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बीमा राशि देने के नाम पर बैंक व कृषि अधिकारी बरगला रहे हैं।
महिला किसान राजेश ने बताया कि वह परिवार की मुखिया है। अपनी आठ बीघा जमीन में आलू बोया था किंतु उसकी सारी फसल बर्बाद हो गई है। अब वह किस प्रकार अपने परिवार का पालन पोषण करें और कहां से उधार चुकाये। अब मन करता है कि नहर में कूद कर अपनी जान दे दू।
ग्राम प्रधान विजयपाल सहित गांव के प्रवीण, सचिन कुमार, तेजपाल सिंह, कपिल, धर्मेंद्र, चरकसिंह, अनीस अहमद, बिजेंद्र, नीरज, महकसिंह, राजेंद्र, अशोक, भूरा, देवराज, इंद्रदेव, अमरपाल, सहदेव सहित दर्जनों किसानों ने नष्ट हुई फसल के मुआवजे की गुहार प्रशासन से लगायी है। उधर, जिला कृषि अधिकारी रामजतन मिश्रा का कहना है कि किसान की फसल के दो प्रकार के बीमे होते हैं। लोन बीमा तथा नॉन लोन बीमा, दोनों में ही किसान अपनी फसल का उल्लेख बैंक में करता है। प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने पर एसडीएम से इस बाबत मिला जा सकता है।