मुजफ्फरनगर। यूपी गौरव के लिए चुने ओज के कवि डॉ. हरिओम पंवार का जिले से गहरा नाता है। दो साल तक उन्होंने डीएवी डिग्री कॉलेज में कानून पढ़ाया। भाकियू के किसान आंदोलनों के दौरान मंच से उनकी कविता पश्चिम उत्तर प्रदेश के गांव-गली तक पहुंची।
डीएवी के विधि संकाय वह 70 के दशक में शिक्षक रहे। निराला पुरस्कार, भारतीय साहित्य संगम पुरस्कार और रश्मि पुरस्कार भी उन्हें मिल चुका है।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रदीप जैन ने बताया कि एलएलबी में उनसे शिक्षा हासिल करने का अवसर मिला। कक्षा के बाद उनकी कविताओं के साथ चाय और समोसा भी उनकी ओर से ही होता था।
डीएवी में भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. राहुल शर्मा ने बताया कि मेरठ कॉलेज से पढ़ाई होने के बाद उनके शिक्षण की शुरुआत यहीं से हुई। भाकियू के मेरठ कमिश्नरी के आंदोलन में वह किसानों के बीच खूब लोकप्रिय हुए। दिवंगत चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत से उनकी घनिष्ठता रही।
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लाल किले पर काव्य पाठ के लिए बुलावा
आपातकाल खत्म होने के बाद जनता पार्टी की सरकार बनने पर लाल किला कवि सम्मेलन में डॉ. हरिओम पंवार को बुलाया गया। पहली बार बड़े मंच पर उनका काव्य पाठ हुआ। इसके बाद उनकी ओज भरी कविताओं की गूंज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुनी जाने लगी।
परायों को अपना बनाने का है हुनर
रेलवे रोड पर स्वर्गीय धर्मवीर सिंह के आवास पर वह रहे। उनके पुत्र अरुण पंवार ने बताया कि उनके सरल स्वभाव ने दो साल में ही सबको अपना बना लिया था। पिताजी को बड़ा भाई और दादी को अम्मा की तरह मानते थे।
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करुण ने दिया मंच, गौरव बन गए हरिओम
बागपत के रहने वाले ओज के प्रसिद्ध कवि बलवीर करुण बताते हैं कि शुरुआती दिनों में पंवार को काव्य पाठ कराया। इसके बाद कभी हरिओम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह आमजन के कवि हैं।