मुजफ्फरनगर। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले जिले की राजनीति में सियासी मोह का पारा खूब चढ़ रहा है। दिग्गज अपने बेटे-बेटियों, पुत्रवधू, भाई और पत्नी के राजनीति भविष्य का ताना-बाना बुन रहे हैं। समर्थकों के साथ मिलकर टिकट की दावेदारी की व्यूह रचना भी की जा रही है।
पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के परिवार के कई सदस्य प्रधान पद से लेकर चीनी मिल तक की राजनीति में खूब सक्रिय हैं। चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप का परिवार टिकट का दावेदार है। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार के साथ ममेरा भाई गौरव उर्फ मोनू भी सियासत का पाठ सीख रहा है।
रालोद के बिजनौर के सांसद चंदन चौहान अपनी पत्नी यशिका चौहान को चुनाव लड़ाना चाहते हैं। साथ ही उनका भाई सिद्धार्थ चौहान भी सक्रिय है।
दोनों हाथों में लड्डू चाहते हैं हरेंद्र मलिक
पश्चिम यूपी के सबसे पुराने नेताओं में शामिल सपा सांसद हरेंद्र मलिक के बेटे पंकज मलिक चरथावल से सपा के विधायक हैं। सियासी गलियों में बार-बार चर्चा चलती हैं कि वह अपने दूसरे बेटे निशांत मलिक को 2027 में बुढ़ाना विधानसभा से चुनाव लड़ाना चाहते हैं। यह भी चर्चा है कि पंकज मलिक के लिए बुढ़ाना में मैदान तैयार किया जा रहा है।
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बेटे को सियासत सिखा रहे हैं राजपाल
रालोद विधानमंडल दल के नेता राजपाल बालियान के बेटे अनिल बालियान ने 2027 से पहले सक्रियता बढ़ा दी है। सामाजिक कार्यक्रमों में उन्हें देखा जा सकता है। प्रचार के जगह-जगह होर्डिंग भी लगने शुरु हो गए हैं। हालांकि विधायक यह भी कहते हैं कि 2027 में तो वह खुद ही लड़ेंगे।
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शिवान के लिए पिता बना रहे मैदान
पूर्व राज्यसभा सांसद राजपाल सैनी अपने बेटे शिवान सैनी के लिए राजनीति का मैदान तैयार कर रहे हैं। वर्ष 2017 में शिवान को खतौली से चुनाव लड़ाया गया था लेकिन हार का सामना करना पड़ा। पूर्व सांसद वर्तमान में भाजपा में है लेकिन चर्चा है कि वह जल्द ही सपा में शामिल हो सकते हैं। मीरापुर से बेटे के लिए टिकट के जुगाड़ में हैं।
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सलमान की चिंता में पूर्व मंत्री सईदुज्जमां
पूर्व मंत्री सईदुज्जमां अपने बेटे सलमान सईद के राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित है। वर्ष 2027 में सलमान को मीरापुर से कांग्रेस के टिकट का दावेदार बताया जा रहा है। इससे पहले वह चरथावल से चुनाव हार चुके हैं। राजनीति में उनकी तीसरी पीढ़ी का अब तक खाता नहीं खुल सका है।
राजनीति में नए मुकाम की तलाश में आलम
पश्चिम यूपी की राजनीति में खास मुकाम रखने वाले पूर्व सांसद अमीर आलम का परिवार राजनीति में नई मंजिल की तलाश में है। पूर्व सांसद के बेटे नवाजिश आलम वर्ष 2022 में सपा के टिकट पर बुढ़ाना से विधायक चुने गए थे। दूसरे बेटे डॉ. रविश को लेकर भी तैयारियां चल रही थीं। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद से परिवार एक भी चुनाव नहीं जीत सका है। वर्तमान में आसपा से नए समीकरण बनाने की तैयारी है।
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बेटे प्रभात पर दांव खेल सकते हैं विक्रम सैनी
खतौली से दो बार के विधायक विक्रम सैनी सियासत में सक्रिय हैं। दंगे के मुकदमे में सजा के कारण खतौली से पत्नी को चुनाव लड़ाया था लेकिन रालोद के मदन भैया के सामने हार का सामना करना पड़ा। 2027 में अब वह बड़े बेटे प्रभात सैनी को भी चुनाव के मैदान में उतार सकते हैं।
प्रमुख के चुनाव में हार...चेयरमैन का पद मिला
भाजपा से एमएलसी वंदना वर्मा का बेटा पुलकित वर्मा राजनीति में सक्रिय है। पिछली बार जानसठ ब्लॉक प्रमुख का चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। बेटे के लिए राजनीतिक समीकरणों पर मंथन चल रहा है। वर्तमान में लखनऊ में आवास वित्तीय निगम के चेयरमैन पद पर काबिज हैं।
बेटी सुप्रिया के लिए मिथलेश पाल की चिंता
मीरापुर से रालोद विधायक मिथलेश पाल के साथ उनकी बेटी सुप्रिया पाल भी राजनीति में सक्रिय है। पंचायत चुनाव के लिए प्रचार भी शुरू कर दिया है। वर्ष 2027 में रालोद विधायक अपने बेटी के लिए भी टिकट मांग सकती है।
पुत्रवधू को चुनाव लड़ा चुके हैं कादिर राना
पूर्व सांसद कादिर राना अपनी पुत्रवधू सुम्बुल राना को मीरापुर के उपचुनाव में सपा से टिकट दिलाने में कामयाब हुए थे। चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। 2027 में वह बेटे और पुत्रवधू के लिए टिकट के दावेदारों में शामिल हैं। इसके अलावा राना परिवार के कई सदस्य राजनीति में है।