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प्रख्यात शायर अशोक साहिल का निधन

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मुजफ्फरनगर : प्रख्यात शायर अशोक साहिल। फाइल फोटो। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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प्रख्यात शायर अशोक साहिल का निधन
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मुजफ्फरनगर। देश के विख्यात शायर अशोक साहिल (64) का सोमवार को मेरठ के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। देश-विदेश में शायरी के दम पर अपनी पहचान कायम करने वाले अशोक साहिल के निधन से साहित्य जगत शोक में डूब गया है। वह जिले के एकमात्र ऐसे शायर थे, जिन्हें मुशायरे और कवि सम्मेलन दोनों में बुलाया जाता था। उनका शुकतीर्थ के गंगाघाट पर गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
अशोक कृष्ण अरोरा उर्फ अशोक साहिल का परिवार बंटवारे के बाद पाकिस्तान के भावलपुर से आकर पंजाब में बसा था। करीब 40 साल पहले इनका परिवार मुजफ्फरनगर आया। अशोक साहिल का बचपन गरीबी में बीता। उन्होंने कई काम शुरू किए, लेकिन कोई व्यापार चल नहीं पाया। इस दौरान उन्होंने खतौली में कपड़ों का भी काम किया। उनकी पत्नी आशा भगत एएनएम थीं। इसके बाद वे जिला चिकित्सालय परिसर में मिले आवास में रहते थे। दो साल पहले कैंसर से पत्नी का निधन हो गया था, तभी से वह बीमार रहने लगे थे। किडनी खराब होने के कारण वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बीते डेढ़ साल से बड़ी बेटी आकांक्षा भगत के पास साहिल ग्रेटर नोएडा में रह रहे थे। कुछ दिनों से हालत बिगड़ने पर उन्हें मेरठ के सुशीला जसवंत राय अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार को सुबह उनका निधन हो गया। उनके दामाद तरुण जोशी ने बताया कि अशोक साहिल की तीन बेटियां आकांक्षा, शिवानी और प्रियंवदा हैं। दोपहर को उनका शुकतीर्थ के गंगा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके परिवार के योगेश शर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में परिजन, रिश्तेदार और परिचित मौजूद रहे।
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नजर, नजर में उतरना कमाल होता है...
अशोक साहिल की लिखी रचना नजर, नजर में उतरना कमाल होता है, नफ़स नफ़स में बिखरना कमाल होता है, बुलंदियों पे पहुंचना कोई कमाल नहीं, बुलंदियों पे ठहरना कमाल होता है। उनकी यह रचना देश में काफी सराही गई थी।
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