- विशेष अपर सत्र न्यायालय पॉक्सो एक्ट के पीठासीन अधिकारी बाबूराम ने फैसला सुनाया
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। एक मामले में बाल अपचारी घोषित करने के मामले में विशेष अपर सत्र न्यायालय पॉक्सो एक्ट के पीठासीन अधिकारी बाबूराम ने फैसला सुनाया। अदालत ने किशोर न्याय बोर्ड के निर्णय को त्रुटिपूर्ण मानते हुए अपास्त कर दिया। स्कूली अभिलेखों में दर्शाई जन्म तिथियों में भिन्नता पाए जाने पर अदालत ने दांडिक अपील पर निर्णय दिया।
कस्बा मीरापुर निवासी अपीलार्थी ने जानलेवा हमले के मामले में भाई को किशोर अपचारी घोषित कराने के लिए किशोर न्याय बोर्ड में आवेदन किया था। अधिवक्ता के माध्यम से तर्क दिया कि घटना की तिथि के वक्त हाईस्कूल के स्कूली अभिलेखों के अनुरूप अपचारी भाई की उम्र 17 वर्ष चार महीने और 23 दिन आती है। किशोर अपचारी घटना के वक्त अव्यस्क था। लेकिन किशोर न्याय बोर्ड ने किशोर अपचारी को दिनांक 17 जुलाई 2023 के निर्णय में व्यस्क घोषित किया।
किशोर के भाई विकास ने किशोर न्याय बोर्ड के विरुद्ध अपर न्यायालय में अपील दाखिल की। सुनवाई के बाद अदालत ने स्कूली अभिलेखों का अवलोकन किया एवं साक्ष्यों की गवाही का परीक्षण किया। पीठासीन अधिकारी बाबूराम ने किशोर न्याय बोर्ड के निर्णय को त्रुटिपूर्ण मानते हुए अपास्त कर दिया। कहा कि बोर्ड ने हाईस्कूल में अंकित जन्म तिथि को वरीयता नहीं दी। पाॅक्सो कोर्ट ने आदेशित किया किशोर न्याय बोर्ड निर्णय में दिए गए निष्कर्ष के प्रकाश में दोनों पक्षों को पुन: सुनकर निर्णय पारित करें।