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सूची में नाम देखने के लिए आठ दिन से कतार में लोग

Fri, 19 Jan 2018 12:18 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
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पीएम आवास योजना में अपना नाम देखने के लिए लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पीएम आवास योजना के शहरी पात्रों की जांच की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ने विजन ईआईएस कंसल्टिंग कंपनी को दी हुई है। कंपनी केंद्र सरकार से एक आवास की जांच के 3200 रुपये ले रही है, लेकिन सुविधा कुछ नहीं दे रही। आठ दिन से शहर की जनता पालिका में ठोकरें खाने को मजबूर है, उन्हें अपने आवास को लेकर सही जानकारी नहीं मिल रही है। कंपनी ने जो कर्मचारी लगाए हैं, वह व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे हैं।
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केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना में पात्रों की जांच का काम गाजियाबाद की विजन कंपनी को दिया हुआ है। इस कंपनी को लाभार्थियों की जांच कर उन्हें जानकारी देने से लेकर आवास निर्माण के बाद फोटो अपलोड करने तक की जिम्मेदारी दी गई है। इस काम के लिए एक मकान पर कंपनी को सरकार 3200 रुपये का भुगतान करेगी। जिले के समस्त शहरी क्षेत्रों के पात्रों की जांच कंपनी के लोग ही कर रहे हैं।

यह जांच उन लाभार्थियों की हो रही है, जिन्होंने पीएम आवास योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। मुजफ्फरनगर पालिका क्षेत्र के 31,584 लाभार्थियों की जांच कंपनी ने की है। जांच के बाद चयनित लाभार्थियों, पेंडिंग और रिजेक्ट लोगों की सूची भी चस्पा कर दी है। नगर पालिका में यह सूची चस्पा की गई है। अंग्रेजी में सूची लगने से हिंदी पढ़ने वाले लोगों की समझ में कुछ नहीं आया।
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सूची में एक साथ 31 हजार से अधिक नाम होने के कारण भी लोगों का अपना नाम नहीं मिला। एक सप्ताह से शहर की जनता रोज पालिका में कतार में लगती है, लेकिन हल कुछ नहीं निकलता। कंपनी ने एक छोटी सी जगह में अपना काम शुरू कर रखा है, ज्यादातर कर्मचारी अनट्रेंड हैं।

नियमानुसार कंपनी को टेंट लगाकर जनता को सम्मान के साथ जानकारी देनी थी। कंपनी ने अपना पूरा पैसा बचाने के लिए पालिका की बिल्डिंग का ही प्रयोग किया। बड़ी बात यह है कि भारत सरकार द्वारा पूरा पैसा देने के बाद भी कंपनी ने शहर की जनता को ठोकरें खिला रखी हैं। कंपनी का कोई अधिकारी भी यहां व्यवस्था देखने के लिए नहीं आया।

11,958 आवेदन अभी भी पेंडिंग 
मुजफ्फरनगर। कंपनी की लापरवाही का नतीजा यह है कि शहर में 11,958 अभी भी पेंडिंग पड़े हैं। कंपनी के अधिकारी किसी के घर पर जांच के लिए गए ही नहीं। इस कारण कागजों की पूर्ति के अभाव में आवेदन पेंडिंग हैं, जिन लोगों ने अपने समस्त कागज पूरे कर रखे थे, उन्हें पात्र मान लिया गया। विजन ईआईएस कंसल्टिंग कंपनी शहर में 31,584 लोगों की जांच का दावा कर रही है। इनमें 10,474 लोगों के आवेदन रिजेक्ट किए गए हैं।

सूची में 534 ऐसे पात्र सामने आए हैं, जिनके पास अपनी जमीन है, इन्हें 60 वर्ग मीटर में मकान बनाने के लिए तीन से छह लाख तक का ऋण साढ़े छह प्रतिशत ब्याज की दर से 15 साल तक के लिए दिया जाएगा। 3778 परिवार ऐसे हैं, जो किराए पर रहते हैं, इनके पास मकान के लिए जमीन नहीं है।

शहर में 1388 ऐसे लोगों का चयन पात्रता सूची में हुआ है, जिन्हें आवास बनाने के लिए ढाई लाख रुपये का सीधे अनुदान दिया जाएगा। 893 ऐसे पात्र भी सामने आए हैं, जिन लोगों के पास एक कमरा बना है और वह बाकी निर्माण करना चाहता है, ऐसे पात्रों को डेढ़ लाख के हिसाब से अनुदान दिया जाएगा। 

10 करोड़ रुपये कंपनी को मिलेंगे 
मुजफ्फरनगर। शहर के लाभार्थियों की पात्रता की जांच करने वाली कंपनी को 10 करोड़ 10 लाख रुपये मिलेंगे। शहर में 31,584 लोगों की जांच हो रही है। एक हाउस पर 3200 कंपनी को मिलेंगे, ऐसे में 10 करोड़ 10 लाख 68 हजार 800 कंपनी को मिलेगा। 

हम संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं: ईओ 
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका के ईओ विकास सैन का कहना है कि उन्हें यह मालूम नहीं है कि कंपनी को इतना पैसा जांच के नाम पर मिल रहा है। हम तो पालिका की ओर से यथासंभव मदद उपलब्ध करा रहे हैं। 

कंपनी को अलग से इंतजाम करने चाहिए 
मुजफ्फरनगर। डूडा के परियोजना अधिकारी धन प्रकाश का कहना है कि शहर की जनता को परेशानी केवल अव्यवस्था के कारण उठानी पड़ रही है। सरकार जब कंपनी को पैसा दे रही है तो उसे किसी खुले स्थान पर टैंट लगाकर जनता को जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए थी। कंपनी को जो 3200 रुपया मिल रहा है, उसमें सभी खर्चे जुड़े हैं। 
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