संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। डीएवी डिग्री कॉलेज में ‘सरोकार-2022’ अंतर्गत आयोजित व्याख्यान में प्रख्यात लेखक एवं चिंतक प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा कि इस दौर में हमें यह सोचना होगा कि राष्ट्रवादी कौन है? क्या भारत माता की जय और वंदेमातरम बोलने वाला राष्ट्रवादी है या वह जो सच्चे अर्थों में इस राष्ट्र को बनाता है। हमें यह समझना होगा कि राष्ट्र कोई वस्तु या सामग्री नहीं है। राष्ट्र को बहुत ही मुश्किल और सहयोग से बनाना पड़ता है।
व्याख्यान में अपूर्वानंद ने कहा कि भारत में आधिकारिक तौर पर मूर्ख बनाने का अभियान चल पड़ा है। जब हम अपने हिस्से का कुछ दूसरों को प्रदान करते हैं और वापस मांगने की अपेक्षा नहीं करते हैं तो यही सच्चा राष्ट्रवाद है। हम राष्ट्र को जितना आसान समझते हैं, यह उतना नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद का रास्ता कई जगह संकरा हो जाता है जबकि मानवतावाद के रास्ते में फैलाव है। इस दौर में संवाद की जगह फैलनी चाहिए लेकिन आज संवाद खत्म होता जा रहा है।
डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजीव मित्तल, कार्यक्रम के संयोजक रोहित कौशिक, प्रोफेसर आरएम तिवारी, डॉ. गरिमा जैन, डॉ. विपिन जैन, डॉ. मृदुला मित्तल, अश्वनी खंडेलवाल, परमेंद्र सिंह, कमल त्यागी, शिवकुमार ‘समन्वय’, मनेश गुप्ता, विजय सिंह, अरुण शर्मा, डॉ. प्रदीप जैन, नेमपाल प्रजापति, जेपी सविता, डॉ. ए. कीर्तिवर्द्धन, रामकुमार रागी, निहार रंजन सोनू एवं डॉ. मोहित कौशिक उपस्थित रहे।