महावीर सिंह, जो 76 साल की उम्र में भी नि:शुल्क चित्रकला सीखा रहे है।
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76 साल की आयु में भी जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा देने का जुनून
मुजफ्फरनगर। आदर्श कालोनी में रहने वाले डॉ महावीर सिंह में 76 साल की आयु में भी युवाओं से अधिक जज्बा है। शिक्षा को साधना मानकर वह आज भी ड्राइंग के युवाओं को नि:शुल्क कोचिंग देते हैं। उनके निर्देशन का असर यह है कि उनके 100 से अधिक विद्यार्थी विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में सरकारी नौकरी पा चुके हैं। इतनी आयु में भी स्फूर्ति का कारण वह बताते है कि वह प्रतिदिन शिक्षा का कार्य करते हैं, कभी भी खाली नहीं बैठते।
डीएवी डिग्री कॉलेज में चित्रकला विभाग के विभागाध्यक्ष रहे डॉ महावीर सिंह 17 वर्ष पूर्व 2003 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। रिटायर्ड होने के बाद भी विद्यार्थियों को पढ़ाने का उनका जुनून निरंतर बना है। शिक्षा को उन्होंने कभी भी व्यवसाय नहीं बनाया। छात्र-छात्राओं को पीएचडी, नेट, पीजीटी, टीजीटी, नवोदय विद्यालय में शिक्षक आदि की नि:शुल्क कोचिंग देते हैं। वह उन्हीं बच्चों को समय देते हैं, जिनके अंदर एक जज्बा है। अधिकतम गरीब परिवारों के बच्चे ही उनके पास आते हैं। कोरोना काल में भी वह निरंतर अपने मिशन पर लगे हैं। अपने घर पर बच्चों की भीड़ तो एकत्र नहीं की। एक-एक करके छात्रों को बुलाकर उन्हें प्रशिक्षण देते हैं। सात बच्चे इस समय भी उनके पास तैयारी कर रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए शिक्षा की ज्योति फैला रहे हैं। कला के क्षेत्र में इनकी अलग पहचान है। मुजफ्फरनगर जनपद के ही इनके काफी विद्यार्थी डिग्री, इंटर, परिषदीय कॉलेजों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। नवोदय विद्यालयों, केंद्रीय विद्यालयों और दिल्ली सरकार के स्कूलों में भी इनके छात्र सरकारी नौकरी पा रहे हैं। चरथावल के निकट के अलावलपुर गांव के 17 छात्र-छात्रा सरकारी टीचर है। ये सब इन्हीं से पढ़े हैं। डॉ महावीर मूल रूप से गुनियाजुड्डी गांव के रहने वाले हैं और इनका कहना है कि बच्चों को ईमानदारी के साथ शिक्षा प्रदान करने से ही उनका जीवन दीर्घायु की ओर जा रहा है।
प्रतिदिन करते हैं यज्ञ
मुजफ्फरनगर। डॉ महावीर सिंह प्रतिदिन सुबह के समय यज्ञ करते हैं। आर्य समाज में उनकी गहरी आस्था है और इनका मानना है कि यज्ञ से उनके अंदर ऊर्जा आती है। उनकी जीवन चर्या में यज्ञ और शिक्षा दोनों शामिल है।