पापा मुझे हॉस्पिटल से निकालो, ये मुझे मार डालेंगे
मुजफ्फरनगर। हॉस्पिटल के स्टॉफ ने संक्रमित युवक विकास को इतनी दहशत दी कि वह पूरी रात सो नहीं पाया। सुबह पत्नी पहुंची तो कहा पापा से बात कराओ। अपने पापा से कहा मुझे यहां से निकालो ये मुझे मार डालेंगे। चार घंटे तक ऑक्सीजन नहीं मिलने से विकास की मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई।
जानसठ के नंगला मुबारिकपुर निवासी तेजपाल ने बताया कि उसका बेटा विकास (43 वर्ष) कोरोना से संक्रमित था। छह अप्रैल को उसे बुखार आया। आठ अप्रैल को ऑक्सीजन लेवल 90 पर आया तो उसे शहर के एक हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। यहां उसका सही उपचार चल रहा था। 12 मई की शाम को शहर कोतवाली के कुछ सिपाही जिनकी विकास से दोस्ती थी उससे मिलने हॉस्पिटल गए। इन लोगों ने स्टॉफ से कहा कि हमारा परिचित है इसका ध्यान रखना। आरोप है कि पुलिस के जाने के बाद स्टॉफ ने विकास को पूरा धमकाया। रात में उसके बराबर के एक मरीज की मौत हो गई। तेजपाल ने बताया कि विकास दहशत में पूरी रात जागता रहा। उसकी ऑक्सीजन कभी कम कर दी जाती और कभी बढ़ा दी जाती।
सुबह विकास की पत्नी हॉस्पिटल पहुंची तो वह घबराया हुआ था और उसने अपनी पत्नी को सारी बात बताई। पत्नी ने फोन से उसकी बात कराई तो उसने कहा कि पापा जल्दी आओ और मुझे यहां से निकालो ये लोग मुझे मार डालेंगे। तेजपाल ने बताया कि वह हॉस्पिटल पहुंचा और विकास की हालत देखकर मेडिकल कॉलेज में बेड का इंतजाम कराया। निजी हॉस्पिटल खाली किया तो दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। एंबुलेंस बेगरजपुर मेडिकल कॉलेज पहुंची तो दो घंटे तक वहां ऐसे ही बैठे रहे। दो घंटे बाद उसे ऊपर ले जाया गया। इस बीच उसका ऑक्सीजन लेवल 92 से 46 पर आ गया। शाम को भर्ती हुआ और रात में उसकी मौत हो गई।
तेजपाल ने रोते हुए बताया कि उसके बेटे की मौत नहीं हुई उसकी हत्या हुई है। इसके लिए निजी हॉस्पिटल का स्टॉफ और डॉक्टर जिम्मेदार हैं। उनसे पांच दिन के एक लाख 60 हजार लिए गए। वह अस्पताल वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। उधर, सीएमओ एमएस फौजदार ने बताया कि उनके संज्ञान में इसकी जानकारी नहीं है, परिजन शिकायत करेंगे तो जांच कराई जाएगी।