पंडित जयतीर्थ ने सुरों का जादू बिखेरा
मुजफ्फ़रनगर। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम में पंडित जयतीर्थ मेवुंदी ने भारतरत्न पंडित भीमसेन जोशी की याद ताजा कर दी। प्रसिद्ध किराना घराना की गायकी को सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
स्पिक मैके की विरासत श्रृंखला- 2019 के समापन पर बुधवार को डीएवी कॉलेज में सुविख्यात कलाकार पंडित जयतीर्थ मेवुंदी ने किराना घराने की गायकी की अनेक खूबसूरत प्रस्तुतियां दी। शुभारंभ करने से पहले उन्होंने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे कैराना से ही किराना घराना की नींव रखी गई। कैराना में जन्में महान गायक उस्ताद करीम खान साहब जब कर्नाटक में पहुंचे, तो उनकी गायकी पूरे हिंदुस्तान में फैल गई। भारतरत्न पंडित भीमसेन इसी गायकी के सूर्य बनके निखरे।
पंडित जयतीर्थ मेवुंडी ने कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रात:कालीन राग में बड़े ख्याल से किया। बिलम्बित तीन ताल में निबद्ध इस रचना के बोल थे रैन का सपना मैं का से कहूं। सूक्ष्म आलाप के उपरांत इस राग की आत्मा को कलाकार ने बड़ी चैनदारी के साथ प्रस्तुत किया। इसी राग में उन्होंने छोटे खयाल में भी बंदिशऽ जोगिया मोरे घर आए तथा भई भोर सनी प्रतिभा का बखूबी परिचय दिया। उन्होंने राग जौनपुरी में भी दो मनमोहक बंदिशें प्रस्तुत की। बोल थे- बृज रज मोह लियो, तीन ताल में निबद्ध राग जौनपुरी की बंदिशऽ पायल की झंकार तो अद्भुत ही थी। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुतियों में भी स्व.भीमसेन जोशी जी की याद ताजा कर दी। राम का गुणगान करिए, शारदा सरस्वती तथा जो भजे हरि को सदा भजनों को सुन पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। प्रसिद्ध तबला वादक मिथलेश झा ने कमाल की संगत प्रदान की। दिल्ली के युवा कलाकार ललित कुमार ने हारमोनियम पर बखूबी साथ निभाया। तानपूरे पर निधि देवी ने संगत दी। संचालन जया महेश्वरी ने किया। प्राचार्या डॉ शशि शर्मा तथा कृष्णगोपाल अग्रवाल ने कार्यक्रम का शुुुुभारंभ किया। कलाकारों का अभिनंदन स्पिक मैके के राधा मोहन तिवारी ने किया। राहुल सेन, अभिनव त्यागी, सागर बेनीवाल, गोविंद, हर्ष, शुभम, अनिक, उत्तम, डॉ मृदुला मित्तल तथा डॉ गरिमा जैन का सहयोग रहा। विपिन जैन, सुनीता शर्मा, संजय कुमार, दिलीप मिश्र, राहुल शर्मा, सुशील कुमार, सर्वेश शर्मा, विनय तायल, अभिषेक बंसल, सांवी आदि मौजूद रहे।