आकिंचन की भावना के बिना कोई भी महान नहीं बन सकता
खतौली। नगर के जैन मंदिरों में भक्ति भावपूर्वक मांगलिक क्रियाओं के साथ उत्तम आकिंचन धर्म का पूजन किया गया।
पर्र्यूषण पर्व में उत्तम आकिंचन धर्म पर ऑनलाइन धर्मचर्चा में अशोक जैन ने बताया कि आकिंचन का अर्थ है मेरे से अतिरिक्त कुछ भी मेरा नहीं है। आज सभी प्राणी आकिंचन के अभाव में दुखी है। महात्मा गांधी का सर्वत्र सम्मान उनके आकिंचन भाव के कारण है। इस एक नियम के माध्यम से हम जीवन में शांति ला सकते हैं। ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम किए गए। उत्साहपूर्वक लोगों ने भाग लिया व सर्वत्र मंगल कामना की गई। कोरोना महामारी से बचाव के लिए प्रार्थना करते हुए सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई। इस अवसर पर संजय किराना, मनोज, मुनेश, सुरेंद्र, सुभाष, मुकेश, अजय, सुनील, पतेंद्र, अजय, अरुण, शीलचंद, राजीव, सतेंद्र, विजय, जयकुमार, सुदेश, किशोर, अंजू, डाक्टर ज्योति, करुणा, निधि, हेमलता, डॉक्टर आशा, अनीता आदि का सहयोग रहा।