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Muzaffarnagar News: गणतंत्र की पहली सुबह तिरंगा लेकर निकले थे बच्चे, बूढ़े और जवान

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पहले गणतंत्र की यादें
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गांव की गलियों में तिरंगा लेकर निकाली गई थी प्रभात फेरी

संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। गणतंत्र दिवस की तैयारियां तेज हो गई है। जिलेभर में उत्साह है। पहले गणतंत्र दिवस के साक्षी रहे बुजुर्ग बताते हैं कि उस दिन हर किसी के चेहरे पर उत्साह था। स्कूलों में बच्चों को बताया गया था कि अब वह अंग्रेजों के नहीं बल्कि अपने कानून के हिसाब से जीवन जिएंगे। उन्होंने कहा देशभक्ति नारे के साथ स्कूली बच्चे तिरंगे लेकर प्रभात फेरी निकाल रहे थे।


भारत माता की जय से गूंजा था देश
मुजफ्फरनगर के साकेत कॉलोनी में रहने वाले सूबेदार मेजर धर्मपाल सिंह ने बताया कि पहले गणतंत्र दिवस को वह 11 साल के थे। उस वक्त वह प्राइमरी स्कूल चूनसा में पढ़ाई करते थे। 26 जनवरी 1950 को वह जब स्कूल गए तो महापुरुषों की कहानी और कविताएं सुनाई गई। देशभक्ति नारे लगाए गए। गांव-गांव में रैली निकालकर महापुरुषों के नारे लगाते हुए बच्चे चल रहे थे। उन्होंने बताया कि अध्यापकों ने उन्हें गणतंत्र दिवस के बारे में जानकारी दी। हालांकि प्राइमरी स्कूलों के अध्यापकों को उतनी जानकारी नहीं थी, लेकिन उन्होंने बताया कि था कि अब से अंग्रेजों के हिसाब नहीं बल्कि अपने कानून के हिसाब से जीएंगे। भारत माता की जय, वंदे मातरम्, महात्मा गांधी, चाचा नेहरू, भगत सिंह आदि के नारों की गूंज हर जगह सुनाई दे रही थी।
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हर कोई अपने आप को आजाद सा महसूस कर रहा था।
शामली के गांव आदमपुर निवासी सेवानिवृत्त फौजी जगरोशन मलिक ने बताया कि पहले गणतंत्र दिवस पर वह 10 साल के थे। उन्हें अच्छी तरह से याद है कि 26 जनवरी 1950 को जब पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया तो स्कूलों में बच्चों द्वारा लगाए गए देशभक्ति नारों की गूंज थी। इसके बाद गांव की गली-गली में घूमकर प्रभात फेरी निकाली जा रही थी। स्कूली बच्चे अपने हाथों में तिरंगा लेकर घूम रहे थे और खेतों तक जा रहे थे। अध्यापकों द्वारा उन्हें बताया गया था कि अब वह पूरी तरह से आजाद हो गए है। अब से देश के कानून के हिसाब से जीवन बिताएंगे। उस दिन हर कोई अपने आप को आजाद सा महसूस कर रहा था।
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महात्मा की प्रतिभा पर भी दीजिए ध्यान
प्रेमपुरी स्थित गांधी वाटिका में करीब 1984 को महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। यह प्रतिमा आज जर्जर हालत में ही। बुजुर्ग सुशील कुमार का कहना है कि पार्क का सुंदरीकरण किया जा रहा है, जिसकी वजह से अब यह प्रतिमा यहां हटकर दूसरी जगह लगाई जाएगी, इसलिए ही प्रतिमा धूल जमी हुई है।
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