जांच की फाइलों में दफन हुआ तेल का खेल
मुजफ्फरनगर। शहर के सरकुलर रोड पर 16 सितंबर की सुबह नाले में बहाए गए हजारों लीटर तेल और उससे लगी भीषण आग के मामले में पुलिस जांच तीन हफ्ते से अधिक समय बीतने के बावजूद अधर में लटकी हुई है। या यूं कहें कि फाइलों में दफन हो चुकी है। सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार द्वारा नाले में बहाया गया तेल गोदाम से ही बहाए जाने की पुष्टि करने के बावजूद पुलिस द्वारा अब तक गोदाम मालिक का नाम तक विवेचना में शामिल नहीं किया जा सका है। उधर, प्रशासनिक टीम द्वारा की जा रही जांच भी अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। अब तक जांच अधर में लटके होने को लेकर पुलिस-प्रशासन सभी के अपने-अपने तर्क हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सभी मौन हैं।
यह था पूरा मामला
मुजफ्फरनगर। शहर के सरकुलर रोड स्थित रघुवीर सरन प्रेमकीर्ति सरन के तेल गोदाम से 16 सितंबर की सुबह हजारों लीटर मिट्टी तेल नाले में बहा दिया गया था। सुबह करीब 9.30 बजे किसी के द्वारा नाले में जलती बीड़ी-सिगरेट फेंकने से करीब तीन सौ मीटर तक भीषण आग लग गई थी। अग्निकांड में नेशनल मोटर्स शॉप पर खड़ी मर्सिडीज के साथ ही दो एक्टिवा जलकर नष्ट हो गए थे। श्रीसाईं कारपोरेशन के सीसीटीवी कैमरे व डीवीआर जलकर नष्ट हो गए थे और गांधी आश्रम की दीवारें व शटर खराब हो गए थे।
दर्ज हुए थे दो मुकदमे, तीन ने दी थी तहरीर
मुजफ्फरनगर। नाले में बहाए गए तेल से लगी भीषण आग के मामले में डीएम सेल्वा कुमारी जे के निर्देश पर पूर्ति निरीक्षक नगर अभिव्यक्त राणा की ओर से अज्ञात में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। वहीं, नगरपालिका के सफाई निरीक्षक संजय कुमार ने भी अज्ञात के खिलाफ नाले में तेल बहाकर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मुकदमा पंजीकृत कराया था। गांधी आश्रम के मंत्री जीऊत यादव, श्रीसाईं कारपोरेशन के मालिक मुकेश त्यागी और नेशनल मोटर्स के दिलशाद ने भी तहरीर दी थी, जिन्हें विवेचना में शामिल किया गया था। सभी मामलों की जांच एसओ सिविल लाइंस समयपाल अत्री द्वारा की जा रही है।
पांच सदस्यीय जांच टीम का भी हुआ था गठन
मुजफ्फरनगर। तेल के खेल का भंडाफोड़ करने और नाले में मिट्टी तेल बहाने के मामले में डीएम सेल्वा कुमारी जे द्वारा पांच सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया था। इसमें क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी श्यामसुंदर राम, पूर्ति निरीक्षक अनुज सिंह व माप विज्ञान विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक हरीश प्रजापति को भी शामिल किया गया था। दो दिन में जांच टीम को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उक्त जांच रिपोर्ट कहां और किस स्तर पर अटकी हुई है, किसी को कोई जानकारी नहीं है।
इन्होंने कहा ..........
सिविल लाइंस एसओ समयपाल अत्री का कहना है कि मामले की जांच के दौरान गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, वहीं नक्शा भी बनाया गया है। दोनों मुकदमे अज्ञात में दर्ज हैं, वहीं तीनों तहरीर भी अज्ञात के ही खिलाफ दी गईं हैं, जिसके चलते जांच पूरी होने तक गोदाम मालिक का नाम विवेचना में शामिल नहीं किया गया है।
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सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार का कहना है कि तेल गोदाम में जांच के दौरान कागजात के हिसाब से पूरा तेल मिला था। नाले में मिले तेल और गोदाम में मौजूद तेल के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। तेल गोदाम से ही बहाया गया, लेकिन जब तक लैब से रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक तथ्यात्मक लिहाज से कुछ नहीं कहा जा सकता। मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तेल गोदाम को सील कर दिया गया था, जो अब तक सील ही है। दो मुकदमों की जांच पुलिस कर रही है तथा विभागीय जांच पूर्ति विभाग कर रहा है। दोनों को जल्द जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए है।