चुनाव में कोई गड़बड़ न हो, इसके लिए चुनाव आयोग ने प्रशासन से कमर कसने को कहा है। संवेदनशील और जिन गांवों में वोटरों को डराया-धमकाया जाता है। वहां आयोग ने आब्जर्वरों को कड़ी नजर रखने को कहा है। इसके लिए संवेदनशील बूथों पर वाई-फाई इंटरनेट की सुविधा होगी। इंटरनेट कनेक्शन के जरिये आब्जर्वर के मोबाइल बूथों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से लिंक रहेंगे, ताकि पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
पहले चरण में जनपद में 11 फरवरी को मतदान होना है। इसके लिए जनपद में चुनाव आयोग ने प्रेक्षकों भी तैनात किया है। प्रेक्षक और प्रशासन साथ मिलकर मतदान की तैयारियों में जुटे हैं। जिले की छह विधानसभाओं में 1819 बूथ बनाए गए हैं। जिन पर 19 लाख 12 हजार से अधिक मतदाता वोटिंग करेंगे। लेकिन, पुलिस और प्रशासन ने जांच पड़ताल के बाद 1135 बूथों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है। जबकि जिले में 107 गांव ऐसे हैं। जिनमें वोटरों को वोट डालने से प्रभावित करने की संभावनाएं जताई गई है।
इन ग्रामों को वनरेबल श्रेणी में रखा गया है। इसको लेकर प्रशासन विशेष व्यवस्था करने में लगा है। संवेदनशील बूथों पर प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इन पर इंटरनेट की वाई-फाई सुविधा जोड़ी गई है। इंटरनेट के माध्यम से चुनाव आयोग के आब्जर्वरों के मोबाइल फोन लिंक रहेंगे। जिससे आब्जर्वर इन बूथों की प्रत्येक क्षण को लाइव देखेंगे। उधर, 85 प्रतिशत से अधिक मतदान वाले बूथों पर तिरछी नजर रहेगी।
प्रशासन ने वर्ष 2012 के विधानसभा और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव का रिकार्ड खंगाला है। जहां-जहां बूथों पर 85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था। उनमें फर्जी मतदान होने का भी शक है। इसको लेकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। यहां पर वोटरों की स्थिति और मतदान पर प्रशासनिक अधिकारी निगाह रखेंगे। इसके अलावा प्रत्येक दो घंटे के मतदान प्रतिशत को सीधे आयोग को भेजा जाएगा। सुबह सात बजे से ही मतदान प्रारंभ होगा।