अब न बजेगा बैंड-बाजा, न चढ़ेगी छत
भोपा (मुजफ्फरनगर)। थाना क्षेत्र के गांव शुक्रतारी निवासी 30 से अधिक मजदूरों के अरमानों पर कोरोना वायरस ने पानी फेर दिया है। दिसंबर-19 में ये मजदूर काम करने छत्तीसगढ़ गए थे, जहां से लौटकर कोई बहन-बेटी की शादी करता तो किसी ने कच्चे मकान की छत डालने के अरमान पाले हुए थे। इन सभी को कोरोना वायरस के चलते खाली हाथ बैरंग लौटना पड़ा। घर लौटकर 14 दिन के लिए क्वारंटीन हो गए। अब इन मजदूरों की एकमात्र आस मनरेगा है, लेकिन शुक्रतारी ग्राम पंचायत न होने से यह सहारा भी भगवान भरोसे ही है।
भोपा थाना क्षेत्र में गांव शुक्रतारी निवासी ग्रामीण अधिकांशत: मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। दिसंबर-19 में गांव के 30 से अधिक ग्रामीण कोल्हूओं पर काम करने छत्तीसगढ़ गए थे। इनमें शामिल अजय, गौतम, धीर सिंह, राजेंद्र व अर्जुन आदि का कहना है कि दिसंबर से फरवरी तक पहले लगातार बिगड़े मौसम ने उनके काम में अड़ंगा डाला, जिसके बाद मार्च-अप्रैल के सीजन पर उनकी निगाहें टिकी थीं। मार्च में कोरोना वायरस ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दिसंबर से मार्च तक जो भी कमाया था, वह लॉकडाउन अवधि में घर बैठकर पेट भरने में खर्च हो गए। इसके चलते सभी 17 मई को घर लौट आए, जिन्हें यहां 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया। ग्रामीण आनंद ने बताया कि कुछ समय पूर्व उसके पिता की मौत हो गई, जिसके बाद बहन की शादी की जिम्मेदारी उसी पर थी। छत्तीसगढ़ से लौटकर वहां से कमाए रुपयों से बहन की शादी करनी थी, लेकिन अब यह अधर में लटक गया है। वहीं, उदय सिंह का कहना है कि उसका कच्चा मकान है, जो बरसात में टपकता है। इसलिए इस बार छत्तीसगढ़ से पैसा कमाकर वह मकान की छत डालता, लेकिन सीजन चौपट हो जाने से यह सपना अधूरा ही रह गया। इन ग्रामीणों का कहना है कि घर लौटने के बाद मनरेगा से ही उन्हें काम मिलने की उम्मीद है, लेकिन शुक्रतारी को ग्राम पंचायत का दर्जा न होने से यह आस भी पूरी होना टेढ़ी खीर है। ग्रामीणों ने अब शासन-प्रशासन से उनके लिए काम उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है, ताकि घर की रोजी-रोटी चलती रहे।
इन्होंने कहा ..........
एसडीएम जानसठ कुलदीप सिंह मीणा का कहना है कि मजदूरों का मामला उनके संज्ञान में नहीं था। बीडीओ प्रभात कुमार श्रीवास्तव को तत्काल शुक्रतारी जाकर पीड़ित मजदूरों से संपर्क करने और मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही मजदूरों के जॉब कार्ड बनाने के साथ ही उनके जर्जर आवासों की भी मरम्मत कराई जाएगी। सभी को सुनिश्चित रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।