लोकसभा चुनाव में ताल ठोंक रहे भाजपा व रालोद प्रत्याशी सहित दस प्रत्याशियों को व्यय प्रेक्षक ने चुनावी खर्च का सही लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं करने पर नोटिस जारी कर दिया है। चुनावी खर्च में आय का ब्योरा नहीं दिए जाने पर यह कार्रवाई की गई है, जिसमें अगले 48 घंटे के भीतर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
लोकसभा चुनाव में ताल ठोंक रहे प्रत्याशियों द्वारा किए जा रहे चुनावी खर्च पर चुनाव आयोग कड़ी नजर रखे हुए है। इसके तहत प्रत्याशियों को चुनावी खर्च का ब्योरा जमा कराते समय आय की जानकारी भी देने के निर्देश दिए जा रहे हैं। चुनाव व्यय प्रेक्षक ओपी चौधरी ने बताया कि एक अप्रैल को सभी प्रत्याशियों के व्यय रजिस्टर का मिलान किया जाना था, लेकिन तीन प्रत्याशियों ने निर्धारित तिथि में व्यय रजिस्टरों की जांच नहीं कराई।
इनमें निर्दलीय प्रत्याशी नील कुमार, जनसत्ता पार्टी के प्रत्याशी जयपाल सैनी और मजदूर किसान यूनियन के प्रत्याशी मांगेराम कश्यप शामिल हैं। उक्त तीनों प्रत्याशियों को सहायक रिटर्निग आफिसर लोकसभा क्षेत्र द्वारा नोटिस जारी करते हुए स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए है। व्यय प्रेक्षक के शब्दों में, इनके अलावा सात प्रत्याशियों गठबंधन के चौधरी अजित सिंह, भाजपा प्रत्याशी डॉ संजीव बालियान, भारत लोक सेवक पार्टी के प्रत्याशी कृष्णपाल के साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी अंकित, यज्ञपाल सिंह राठी, एसएसकेएस गंगवाल और अशोक कुमार को भी सहायक रिटर्निग आफिसर द्वारा नोटिस जारी किया गया है।
उक्त सभी प्रत्याशियों को जमा धनराशि का स्रोत स्पष्ट नहीं करने, चुनावी खर्चों को पूर्णत: सही न दर्शाने और तिथिवार मय बाउचर के उपलब्ध नहीं कराए जाने का दोषी पाया गया है, जो सीधे तौर पर भारत निर्वाचन आयोग के आय एवं व्यय नियमों का स्पष्टतया उल्लंघन है। इसके चलते उक्त सभी प्रत्याशियों को सभी बिंदुओं पर 48 घंटे के भीतर स्थिति स्पष्ट करने और व्यय प्रेक्षक के समक्ष सभी कमियों को दूर करते हुए व्यय लेखा प्राथमिकता के आधार पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रत्याशियों की बढ़ी मुश्किलें
मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव में दम ठोंक रहे सभी प्रत्याशी अब तक चुनावी खर्च के हिसाब की औपचारिकता पूरी कर रहे थे, जिसे चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया है। चुनाव प्रेक्षक ने इस पर नाराजगी जताते हुए सभी प्रत्याशियों को नोटिस जारी कर प्रत्येक खर्च का बाउचर और सही हिसाब देने के निर्देश दिए हैं, जिससे प्रत्याशियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।