फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एनएचआरसी की रिपोर्ट में कम्युनल फ्लेवर

Tue, 18 Oct 2016 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
विकास भवन में राष्ट्रीय अल्पसख्यक आयोग के सदस्य अधिकारियों की बैठक लेते हुए। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर/कैराना। पलायन प्रकरण पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट की हकीकत जानने के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की टीम कैराना पहुंची। टीम ने इस रिपोर्ट को कम्युनल फ्लेवर वाली बताया है। यहां तक कहा कि रिपोर्ट में कैराना को बदनाम करने का प्रयास किया गया है। रिपोर्ट पूरी तरह वास्तविकता से परे है। कैराना में पलायन का कारण हिंदू-मुस्लिम विवाद नहीं, बल्कि लगातार बढ़ता अपराध है।   
विज्ञापन


सोमवार को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य कैप्टन प्रवीण डाबर और प्रोफेसर फरीदा अब्दुल्ला खान कैराना पहुंचीं। उनके रुकने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में की गई थी। यहां टीम के सदस्यों ने एडीएम भरतजी पांडेय, एएसपी अनिल झा और प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता की। इसके बाद पत्रकारों से वार्ता में फरीदा अब्दुल्ला खान ने बताया कि पिछले माह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि कैराना से लोगों के पलायन का एक कारण 2013 के सांप्रदायिक दंगों के बाद कैराना में आकर बसे दंगा पीड़ित शरणार्थी भी हैं। उसी जांच रिपोर्ट के बारे में जानकारी करने कैराना आए हैं।

फरीदा ने कहा कि यहां हिंदू मुस्लिमों में विवाद नहीं है। गुंडागर्दी और अपराध के कारण व्यापार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि कैराना शहर क्षेत्र में 270 दंगा पीड़ित परिवार और कैराना ब्लाक क्षेत्र में 1300 दंगा पीड़ित परिवार आकर बसे हैं। पत्रकारों ने जब आयोग की टीम से पूछा कि सच्चाई जानने के लिए क्या पीड़ित परिवारों से मिलेंगे, तो फरीदा खान ने कहा कि हम यहां केवल प्रशासनिक अधिकारियों से जानकारी लेने आए हैं। पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए पूरी टीम की जरूरत होती है। इस अवसर पर कस्बे के कुछ जिम्मेदार लोगों ने भी टीम को बताया कि यहां राजनीति के कारण गुंडागर्दी बढ़ी है। साथ ही सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी, बाल मजदूरी की भी शिकायत की गई। 
विज्ञापन


उधर, मुजफ्फरनगर विकास भवन में पत्रकारों से वार्ता में फरीदा और प्रवीण ने कहा कि कैराना पलायन की सच्चाई सब जानते हैं। पलायन का सबसे बड़ा कारण बाहर व्यवसाय करना रहा है। पलायन करने वाले हिंदू और मुसलमान दोनों समुदाय के लोग हैं। कैराना में कोई भय नहीं है, जिन लोगों का रोजगार दूसरे शहरों में हो गया वह कैराना छोड़कर उसी शहर में रहने लगे। मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट ने सच्चाई को दरकिनार किया है। कुछ मामलों में कानून व्यवस्था कारण हो सकती है, लेकिन यह कहना कि एक वर्ग विशेष ने डरकर कस्बा छोड़ा है, गलत है। 

फरीदा ने कहा कि सात सितंबर 2013 इस जिले के लिए बुरा दिन था, लेकिन दंगे के बाद से हालात बदले हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग इस बात की भी
जांच कर रहा है कि 2017 के विधानसभा चुनाव पर दंगे का असर होगा कि नहीं। कितना प्रभाव रहेगा और समाज में इस समय क्या हालात हैं, आयोग इसका बारीकी से अध्ययन कर रहा है। दोनों सदस्यों ने दंगा पीड़ित बस्तियों में जाकर वहां के हालात भी देखे। अधिकारियों के साथ बैठक में दंगा पीड़ितों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली। 

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने कैराना में शामली रोड पर स्थिल हसन कॉलोनी में दंगा पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। काफी देर यहां रुकी टीम ने उनसे कई मुद्दों पर बात की। दंगा पीड़ितों  ने टीक सदस्यों को बिजली और पान की समस्या से अवगत कराया।  प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें