बच्ची को मां की गोद में सौंपते अधिकारी।
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लोकलाज के भय से खालापार में एक घर की चौखट पर छोड़ी गई सुनैना को आखिर मां की गोद मिल ही गई। जिला चिकित्सालय में भर्ती मासूम को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और पुलिस की मौजूदगी में उसकी मां कौशर की सुपुर्दगी में दे दिया गया।
प्रेम प्रसंग के मामले में गर्भवती होने पर निकाह के तीन माह बाद ही बेटी ने जन्म ले लिया था, लेकिन माता-पिता ने समाज के सवालों से डर कर खुद की बेटी को ही लावारिस छोड़ दिया था।
नवजात बेटी को छोड़ने की घटना में जहां मानवीय संवेदनाएं छली गई थी, वहीं मां की बेरुखी से मातृत्व की गरिमा को ठेस लगी। छह जून को शहर कोतवाली के खालापार में डॉ अथहर के घर की चौखट पर एक दिन की मासूम को छोड़ दिया गया। कार में आई महिला ने ही उसे कंबल में लपेट पर रखा था।
सीसीटीवी फुटेज में पूरी घटना सामने आने के बाद मासूम को छोड़ने का राज पुलिस ने खोल दिया। इसी बीच जिला चिकित्सालय में भर्ती मासूम की हालत गंभीर बनी रही। पुलिस के खुलासे के बाद सामने आया कि मां कौशर और पिता सरवर ने बीच पानीपत में प्रेम-प्रसंग हो गया। शहर के न्याजूपुरा गांव की कौशर वहां एक फैक्ट्री में काम करती थी।
जद्दोजहद के बाद फरवरी माह में दोनों को निकाह हो गया, मगर पहले ही कौशर गर्भवती हो गई थी। समाज के सवालों से बचने के लिए उन्होंने अपनी बेटी को गुपचुप जन्म दिया और उसे लावारिस छोड़ने का निर्णय लिया।
सोमवार को जिला चिकित्सालय में वैधानिक प्रक्रिया के बाद मां कौशर की सुपुदर्गी में उसकी बेटी को दे दिया गया। चाईल्ड वेलफेयर कमेटी के पदाधिकारियों, एसआई राजेंद्र वशिष्ठ, सीएमएस डॉ अमिता गर्ग की उपस्थिति में कार्रवाई पूरी हुई। इस दौरान मासूम का पिता पानीपत के बापौली गांव निवासी सरवर नहीं दिखाई दिया।