श्रीशुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि विद्यार्थी के जीवन निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक का पद काफी गरिमापूर्ण है, जो सौभाग्य से मिलता है।
स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि शिक्षक अपने बयान और विद्या से बच्चों को सुयोग्य, स्वावलंबी तथा संस्कारिक बनाने का पुनीत कार्य करता है। अध्यापक को इसीलिए समाज और राष्ट्र का शिल्पी कहा गया है। व्यक्ति, समाज और देश को समृद्ध एवं खुशहाल बनाने का अहम दायित्व शिक्षक पर है,
जिसकी शिक्षा से भावी पीढ़ी विषम हालातों में विजय प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनती है। शिक्षक का मार्गदर्शन प्रत्येक बालक को स्वावलंबी, कर्त्वयनिष्ठ एवं राष्ट्रधर्म के प्रति प्रोत्साहित करता है। यही वह क्षमताएं जिनसे विद्यार्थी देश की सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा राजनैतिक आवश्यक्ताओं की पूर्ति के लिए सक्षम बनता है।
स्वामी ने कहा कि शिक्षक बच्चों को उद्देश्यपूर्ण, गुणात्मक, रचनात्मक, रोजगारपरक, मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करें। गुरुदेव वीतराग स्वामी कल्याण देव कहते थे कि हम अपने जीवन के लिए माता-पिता के ऋणी होते हैं, लेकिन एक अच्छे व्यक्तित्व के लिए हम एक शिक्षक के ऋणी होते हैं। सफल शिक्षक वही है जो सहनशील और सकारात्मक हो। उन्होंने कहा कि शिक्षक को चिंतन, कल्पनाशक्ति जैसे गुणों से संपन्न होना चाहिए।