घर में मुन्ना जी, दोस्त कृष्णा मेनन कहते थे
बुजुर्ग डॉ. सविता बताते हैं कि गिरिराज किशोर जमींदार परिवार से थे। उनके दादा लाला हरिशंकर लाल सलेमपुर गांव के जमींदार थे। पिता लाला सूरजप्रकाश भी जमींदार रहे। शहर के मोती महल में हवेली थी। छह भाइयों और दो बहनों में गिरिराज सबसे बड़े थे। घर में सब उन्हें मुन्ना जी कहते थे, जबकि सावले होने और बाल घुंघराले होने पर दोस्तों में उनका निकनेम कृष्णा मेनन था।
वर्ष 2006 में भतीजी की शादी में आए थे
गिरिराज किशोर और उनकी पत्नी मीरा किशोर छह मई 2006 में अंतिम बार शहर में आए थे। तब अवसर उनकी भतीजी मेघा की शादी का था। शादी समारोह नई मंडी में गणपति पैलेस में हुआ था। शांतिनगर में रहने वाली भतीजी मेघा ने बताया कि वह छोटी बुआ उषा के साथ ही रहती हैं। उषा बुआ का बीमारी के चलते 11 जनवरी को निधन हो गया, ताऊजी को खबर की थी, मगर उनके कूल्हे की हड्डी टूटने के कारण वो बहन की मौत होने पर भी यहां नहीं आ सके।
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