प्रेस वार्ता करते सामाजिक संगठनों के लोग।
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नदियों का प्रदूषण समाप्त करने के लिए अब धर्म का सहारा लिया जाएगा। शहर के पंडित अब प्लास्टिक और अन्य सामग्री से बनी मूर्तियों की पूजा नहीं कराएंगे। कुम्हार के हाथों से बनी मिट्टी की मूर्तियों को ही घरों में होने वाली पूजा में महत्व दिया जाएगा।
सामाजिक संस्था परिवर्तन की पत्रकार वार्ता में नगर के सामाजिक संगठनों और अर्चक पुरोहित संघ ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए धर्म को आधार बनाने की बात कही। संस्था अध्यक्ष कुशपुरी ने कहा कि इस बार गणपति यात्रा के दौरान शहर के सामाजिक संगठन ही पीछे-पीछे सफाई करते हुए चलेंगे। गणपतिधाम मंदिर के पदाधिकारियों ने वार्ता में घोषणा की कि वह इस बार यात्रा के लिए बंगाल के कलाकारों द्वारा बनाई जा रही मिट्टी की मूर्ति शामिल होंगी।। मंदिर समिति पर्यावरण सुरक्षा केे महत्व देगी।
पंडित राज भारद्वाज, विशेषानंद गौतम, श्याम सुंदर मिश्रा, अमित वत्स ने कहा कि अब शहर के सभी पंडित मिट्टी से बनी मूर्तियों से ही पूजा कराएंगे। हमारे यहां भगवान की मूर्तियों और हवन की सामग्री आदि को नदी में बहाने की परंपरा है। यदि मिट्टी की बनी मूर्ति होती हैं तो वह पानी में गिरने के बाद फिर मिट्टी बन जाती हैं। नदियों को सजीव रखने के लिए उनका साफ सुथरा रखा जाना जरूरी है।