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बहादुर बेटी ने सीने पर गोली खाकर बचाई थी पिता की जान, रिया को मिले थे कई अवार्ड

Thu, 13 Jun 2019 02:32 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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रिया का फाइल फोटो और साइड में मेनका गांधी से अवार्ड लेती रिया की मां - फोटो : अमर उजाला
पांच साल पहले दस मार्च 2014 की सुबह सात बजे का वक्त था। मुंडभर गांव में स्थित अपने घर पर किसान सुरेशपाल अपने परिजनों के साथ बैठा था। जमीन की रंजिश में कुटुंब के लोग उससे दुश्मनी रखते थे। कुटुंब के ही हमलावर धारदार हथियारों और तमंचों से लैस होकर मकान में घुस आए। परिजनों पर हमला कर दिया। जमकर फायरिंग की। हमलावरों ने मकान में बैठे इंद्रपाल को घेर लिया। इसका सुरेशपाल ने विरोध किया।
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रिया का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
हमलावरों ने कहा, तूने ही इसे अपने यहां पनाह दे रखी है, तू ही इसकी पैरवी करता है। आज पहले तेरा ही काम तमाम करेंगे। हमलावरों ने सुरेशपाल की ओर तमंचा तान दिया। हमलावरों के इरादे भांप कर बहादुर बेटी रिया तेजी से दौड़ी और पिता को धक्का देकर हमलावरों द्वारा चलाई गोली अपने सीने पर खाकर पिता सुरेशपाल की जान बचा दी। हमलावरों ने उसके पिता सुरेशपाल, मां अनीता और कुटुंब के ताऊ चंद्रपाल को भी घायल कर दिया। बाद में हमलावर फायरिंग करते हुए फरार हो गए।
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रिया के माता-पिता - फोटो : अमर उजाला
भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव मुंडभर निवासी रिया के पिता सुरेशपाल साधारण किसान हैं। पुलिस में कांस्टेबल रहे कुटुंब के ही चंद्रपाल की घर और जमीन पर हमलावर सुनील, रोहताश, ललित पक्ष ने वर्ष 2011 में कब्जा कर लिया था। तीनों ही पक्ष एक ही कुटुंब के हैं। जमीन पर कब्जे का सुरेशपाल विरोध करता था। चंद्रपाल पुत्र चरण सिंह अक्सर सुरेशपाल के यहीं रहता था। जमीन को लेकर ही दोनों पक्षों में रंजिश चल रही थी। इसी को लेकर दोनों पक्षों के कई बार कहासुनी भी हो चुकी थी।

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पीएम मोदी से बापू जयधानी अवार्ड लेती रिया की मां - फोटो : अमर उजाला
10 मार्च 2014 की सुबह हमलावरों ने साजिश रच कर सुरेशपाल के घर पर धावा बोल कर परिजनों पर हमला किया। उनका पहला टारगेट चंद्रपाल सिंह, मगर जब सुरेशपाल ने विरोध किया तो हमलावरों ने उसे ही निशाना बना कर सुरेशपाल पर गोली चला दी, जिसे बेटी रिया ने अपने सीने पर खाकर जान देकर पिता की जान बचा ली थी। पिता सुरेशपाल और मां अनीता को बेटी की मौत का गम ताउम्र रहेगा।
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रिया को मिले अवार्ड दिखाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
प्रोफेसर बनना चाहती थी रिया
छात्रा रिया उच्च शिक्षा हासिल कर रुड़की आईआईटी में अपने दादा डॉ. आरएस वर्मा की भांति प्रोफेसर बनना चाहती थी। ज्ञान दीप पब्लिक स्कूल लालूखेड़ी की इंटर की होनहार छात्रा थी। हाईस्कूल की परीक्षा में भी उसने 96 प्रतिशत अंक हासिल कर स्कूल टॉप किया था। पिता सुरेशपाल और मां अनीता ने बताया कि रिया का सपना प्रोफेसर बनने का था। वह छोटे भाई रोहण को भी इंजीनियर बनाना चाहती थी। बहन के सपने का साकार करने के लिए रोहण वर्तमान में पुणे में इंजीनियरिंग कर रहा है।
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तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से बाल वीरता अवार्ड लेती रिया की मां - फोटो : अमर उजाला
मरणोपरांत मिले थे कई पुरस्कार
मुंडभर गांव की बहादुर बेटी रिया की हत्या का मामला देश भर में चर्चा का विषय बना तो केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान रिया के बलिदान पर गया। उसे मरणोपरांत कई पुरस्कार दिए गए। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उसे बाल वीरता पुरस्कार दिया।

रिया की मां अनीता और पिता सुरेशपाल ने 26 जनवरी 2015 को यह पुरस्कार लिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने उसके माता पिता को बापू जयधानी अवार्ड दिया। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने भी उसे रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड दिया। 2016 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ की ओर से उसे जीवन रक्षक पदक दिया गया। बनानी ग्रुप ने भी उसे वीरता पुरस्कार दिया था।

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