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शिक्षा के मंदिर में सांसद निधि हजम

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शिक्षा के मंदिर में सांसद निधि हजम
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मुजफ्फरनगर। छोटूराम इंटर कॉलेज के मुख्यद्वार के निकट खड़ा खंडहर शिक्षा के मंदिर में गोलमाल का जीता जागता उदाहरण है। पत्थर पर लिखा है कि वर्ष 2001 में इस प्रशासनिक भवन का निर्माण सांसद सईदुज्जमा ने अपनी निधि से कराया। प्रधानाचार्य ने कहा कि निधि का आधा पैसा आने के कारण निर्माण अधूरा है। वहीं, पूर्व सांसद का दावा है कि निर्माण के लिए पूरा पैसा जारी किया था।
जिले की सबसे पुरानी शिक्षण संस्थाओं में से एक चौधरी छोटूराम इंटर कॉलेज में वर्ष 2001 में प्रबंधक एडीआईओएस (सहायक जिला विद्यालय निरीक्षक) विजय पाल सिंह और प्रधानाचार्य ब्रजपाल सिंह मलिक थे। तत्कालीन कांग्रेस सांसद सईदुज्जमा से कॉलेज स्टाफ ने डिमांड की थी कि प्रधानाचार्य के ऑफिस के लिए वे अपनी सांसद निधि से पैसा दे दें। प्रशासनिक भवन का नक्शा पास हुआ और आरईएस के इंजीनियरों ने एस्टीमेट तैयार किया। एक लाख रुपया खर्च आना बताया गया। डिमांड के हिसाब से सांसद निधि से पैसा जारी किया गया। प्रशासनिक भवन में प्रिंसिपल का ऑफिस, लिपिक का कमरा और टॉयलेट आदि बनना था। वर्ष 2020 में 19 साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक भवन आज तक नहीं बना है। कॉलेज के मुख्य गेट के पास एक खंडहर है। इस खंडहर की आगे की दीवार पर एक पत्थर लगा है, जिस पर लिखा है कि इस ऑफिस का निर्माण सांसद सईदुज्जमा की सांसद निधि से कराया गया। कॉलेज के प्रधानाचार्य नरेश प्रताप के मुताबिक प्रबंध संचालक ने उन्हें जानकारी दी है कि स्वीकृत धनराशि एक लाख में से 50 हजार ही मिला था, इस कारण काम पूरा नहीं हो पाया। यह मामला उनके कार्यकाल से पहले का है, उस समय प्रबंधक एडीआईओएस विजयपाल सिंह थे और प्रधानाचार्य ब्रजपाल सिंह मलिक थे। पैसा प्रबंधक के खाते में ही आता था।
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मुझे पहली बार पता लगा ऐसा हुआ : सईदुज्जमां
मुजफ्फरनगर। तत्कालीन सांसद सईदुज्जमां का कहना है कि हमारे यहां से पूरा पैसा जारी हुआ था। वहां निर्माण पूरा नहीं हुआ, इसकी शिकायत आज तक किसी ने नहीं की। कॉलेज में एक लाख की निधि को लेकर क्या खेल हुआ मुझे मालूम ही नहीं। इस मामले को लेकर वह खुद संबंधित अधिकारियों को शिकायत करेंगे।
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हमें आधा पैसा मिलने की जानकारी
मुजफ्फरनगर। चौधरी छोटूराम इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य नरेश प्रताप का कहना है कि वह जब से प्रधानाचार्य हैं, उन्हें यही बताया गया था कि आधा पैसा मिलने के कारण निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ। जो भी खेल हुआ वह तत्कालीन प्रबंधक ने ही किया। इस मामले की जांच हो तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
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