जानसठ में पानीपत खटीमा राजमार्ग से एक साल के अपने बालक को सीने लगाकर पैदल जाता श्रमिक।
- फोटो : KHATAULI
जानसठ। सड़क पर पैदल चलकर अपने घर लौट रहे प्रवासी श्रमिकों का पानीपत खटीमा राजमार्ग पर हुजूम था। इन पैदल प्रवासी मजदूरों के दिलों में अपने को मरने का बेहद गम था। वहीं इनके आंखों में हादसे का खौफ भी नजर आया। जब इन श्रमिकों से बातचीत की गई तो गम भरे लहजे से इन्होंने बताया कि मुजफ्फरनगर में हादसे मरने वाले भले ही उनके साथ न हो, लेकिन बिहार प्रांत रहने वाले उनके भाई थी। श्रमिकों का कहना था कि उनकी जिंदगी भी रामभरोसे हैं। कस्बे में पानीपत खटीमा राजमार्ग पर बृहस्पतिवार सुबह बिहार प्रांत को अपने घर जाने वाले प्रवासी श्रमिकों की लंबी लाइन थी। सड़क पर दूर-दूर तक श्रमिक ही श्रमिक पैदल चलते नजर आ रहे थे। लॉकडाउन के अब तक के दिनों में पहली बार बृहस्पतिवार को प्रवासी श्रमिकों का हुजूम दिखा। बिहार प्रांत के जिला अररिया कटिहार व सहरसा निवासी श्रमिक राघव यादव, विनोद, सतनाम, विश्वनाथ, इस्लाम, रमेया आदि ने बताया कि उनको सरकार की ओर से कोई सुविधा नहीं मिली है। इन श्रमिकों ने बताया कि बुधवार देर रात को मुजफ्फरनगर-सहारनपुर स्टेट हाइवे पर सड़क हादसे में बिहार प्रांत के छह श्रमिक मर गए हैं। इस हादसे का उनको बेहद दुख है। इन श्रमिकों का कहना था कि मरने वाले श्रमिक उनके साथी नहीं थे, लेकिन बिहार प्रांत भाई जरूर थे। उनके मरने का हमें बेहद दुख है। इन श्रमिकों का कहना था कि पता नहीं हम भी पैदल जा रहे हैं, शायद ही जिंदा घर पहुंचे।