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नए साल पर नई उम्मीदों के संदेशों की मची धूम

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नए साल पर नई उम्मीदों के संदेशों की मची धूम
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मुजफ्फरनगर। नए साल की उम्मीदों को लेकर गुजरे साल की हकीकत को लेकर प्यारे संदेशों की बौछार सोशल साइटों पर छाई रही। संदेशों से प्रेरक सीख नजर आई, तो कुछ चुटीले अंदाज में की गई पोस्ट हंसाने का जरिया बनी। एक पोस्ट इस तरह थी, बेखबर मत रहना पिछले साल की तरह...? अगला तो वैसे भी पिछले साल से इक्कीस है...में कोविड महामारी के मर्म के साथ सतर्कता बरतने की हिदायत दे रहा है।
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एक व्हाट्सप ग्रुप पर गृहिणी बबीता ने कोरोना महामारी का संदेश दिया...2020 का सबसे नेगेटिव शब्द रहा पॉजीटिव...इसी तरह संजीदा संदेशों की बौछारों में बीते साल की संकट को भूलने का प्रयास रहा। अधिवक्ता सीताराम आर्य ने साल जरूर बदल रहा है, लेकिन साथ नहीं, स्नेह सदा बना रहें... भेजकर मित्रों को बधाई भेजी। वहीं, शिक्षिका आशा ने सोशल साइटस ग्रुप पर...उम्र का पंछी नित दूर निकल रहा है, जायका लिया नहीं और फिसल गई जिंदगी...फिर एक दिसंबर गुजर रहा है, लो इक्कीसवीं सदी को इक्कीसवां साल लग रहा है,,, शेयर किया। डॉ. विशाल कौशिक फेसबुक पर लिखते हैं..वो भी क्या दिन थे जो अपनो को ग्रीटिंग कार्ड भेजकर नव वर्ष की शुभकामनाएं दी जाती थी। उधर, वहीं पिछले साल पर सटीक बैठता चुटकुला मानें या हकीकत, यह पोस्ट काफी लाइक की गई कि वर्ष 2020 का सबसे लोकप्रिय पेय पुरस्कार जाता है...काढ़ा।
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