मीरापुर क्षेत्र के कवाल गांव में ही करीब 11 साल पहले भड़की दंगे की चिंगारी से मुजफ्फरनगर जल उठा था। दंगे के बाद से नए सियासी समीकरण बने। साल 2022 में सपा-रालोद गठबंधन ने भाजपा को चित कर दिया था।
लेकिन इस बार रालोद का गठबंधन भाजपा के साथ है। नए गठबंधन के साथ मिलकर उपचुनाव में रालोद की साख भी दांव पर लगी है। असल में इसी सीट वाली बिजनौर लोकसभा से रालोद के चंदन चौहान सांसद हैं। उनके सांसद बन जाने से ही मीरापुर सीट खाली हुई है। ऐसे में रालोद के सामने खुद को साबित करने का इम्तिहान है।
करीब 1.20 लाख मुस्लिम मतों की चाल पर सबकी निगाह है। सपा से सुम्बुल राना, बसपा से शाह नजर और आसपा से जाहिद हुसैन चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि मुस्लिमों का रुख क्या रहता है, मुस्लिम दूसरी किस बिरादरी के साथ मिलकर समीकरण बनाकर नतीजों पर असर डालते हैं, सपा का पीडीए फार्मूला यहां कितना कारगर रहता है।
मोरना-मीरापुर से कब कौन रहा विधायक
साल पार्टी विधायक
1967 कांग्रेस राजेंद्र दत्त त्यागी
1969 बीकेडी धर्मवीर त्यागी
1974 कांग्रेस नारायण सिंह
1977 जनता पार्टी नारायण सिंह
1980 जनता एस मेहंदी असगर
1985 कांग्रेस सईदुज्जमां
1989 जनता दल अमीर आलम
1991 भाजपा रामपाल सिंह
1993 भाजपा रामपाल सिंह
1996 सपा संजय सिंह
2002 बसपा राजपाल सैनी
2007 रालोद कादिर राना
2009 रालोद मिथलेश पाल
2012 बसपा मौलाना जमील
2017 भाजपा अवतार भड़ाना
2022 रालोद चंदन चौहान