प्रदेश में महंत आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद की शपथ देने के बाद कवाल कांड और दंगों के दौरान चर्चित रहे मौलाना नजीर अहमद कासमी की पुलिस सुरक्षा को हटा लिया गया है। मौलाना को मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा को एक वर्ष पूर्व तत्कालीन सपा सरकार ने हटा ली थी। इसके बाद मौलाना की सुरक्षा में तीन पुलिसकर्मी को लगाया गया था। रविवार को इन पुलिसकर्मियों को हटा लिया गया।
कवाल में वर्ष 2013 में 27 अगस्त को लड़की से को छेड़छाड़ की घटना को लेकर गांव मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन व गौरव और कवाल के शाहनवाज के बीच संघर्ष हो गया था, जिसमें सचिन व गौरव के साथ शाहनवाज भी मारा गया था। इस मामले को लेकर क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव हो गया था। नौ सितंबर को जानसठ के मदरसा तालीम उल कुरान के मौलाना नजीर अहमद कासमी अपने साथ कुछ लोगों को लेकर कवाल जा रहे थे।
पुलिस ने इनको खतौली तिराहे पर रोक लिया था। इस दौरान मोहल्ला के समर्थकों को काफी हंगामा भी किया था। बाद में पुलिस अधिकारियों के समझाने पर मौलाना लौट गए थे। पुलिस ने उसी दिन मौलाना समेत आधा दर्जन लोगों के विरुद्ध धारा-144 तोड़ने का मुकदमा दर्ज कर लिया था। कवाल कांड के बाद दंगा भड़क गया था। दंगों में मौलाना नजीर अहमद कासमी काफी चर्चाओं में भी रहे।
दंगों के बाद सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने दिल्ली के रहने वाले कांग्रेसी नेता परिवार के माध्यम से मौलाना नजीर अहमद कासमी को मेरठ में विशेष विमान भेजकर लखनऊ बुलवाया था। मौलाना की लखनऊ में मुलायम सिंह यादव व तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मेहमाननवाजी की थी। इसके बाद उनको वाई श्रेणी की सुरक्षा दे दी गई थी। एक वर्ष पूर्व मौलाना की सपा सरकार ने वाई श्रेणी की सुरक्षा हटाकर उनकी सुरक्षा में तीन पुलिसकर्मियों को लगाया था। रविवार को लखनऊ में महंत आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही लखनऊ से पुलिस के आला अधिकारियों ने मौलाना की सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को भी हटा लिया।