2 पुरकाजी के गांव सेठपुरा काली माता मंदिर में विराजमान शिव परिवार
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पुरकाजी। गांव सेठपुरा स्थित माता काली मंदिर श्रद्धालुओं की श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर में आकर माता काली के चरणों में शीश झुकाकर सच्चे मन से मन्नत मांगते हैं।
कस्बे से करीब दो किमी दूर लक्सर रोड पर स्थित गांव सेठपुरा का माता काली मंदिर माता के भक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर पर आसपास क्षेत्र के साथ ही उत्तराखंड व दूर-दराज से श्रद्धालु आकर प्रसाद चढ़ाने के बाद माता के चरणों में शीश झुकाकर घर-परिवार की खुशहाली के लिए मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि माता अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनकी मन्नतें अवश्य पूरी करती है। मंदिर परिसर में माता काली की विशाल प्रतिमा के साथ ही शिव परिवार, भगवान शनिदेव और बजरंग बली की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
चैत्र मास व शारदीय नवरात्रों के दिनों में मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। पुजारी पंडित ब्रजमोहन शर्मा ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1958 में कस्बा निवासी आज्ञाराम छाबड़ा ने कराया था। उनके निधन के बाद उनके भाई हरबंश लाल छाबड़ा और उनके बाद बेटे संजीव इस मंदिर की देखभाल करते हैं।
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12 साल पूर्व हुई थी मूर्ति की पुन: प्राण प्रतिष्ठा
पुरकाजी। काली माता मंदिर में विराजमान माता काली की मूर्ति काफी पुरानी हो जाने के कारण छाबड़ा परिवार ने वर्ष 2009 में मंदिर में माता काली की मूर्ति की पुन: प्राण प्रतिष्ठा कराई थी। परिवार के रवि खुल्लर ने बताया कि प्रतिमा की पुन: प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में अप्रैल माह में जागरण और भंडारे का आयोजन किया जाता है।