मुजफ्फरनगर। विधवा पेंशन घोटाला 20 करोड़ से ऊपर जाएगा। जिस तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं, इससे साफ हो रहा है कि खेल में सफेदपोश भी शामिल हैं।
अभी तक केवल डाकघर में गए पैसे के उन खातेदारों के नाम पता लग पाए, जिनके खातों में पैसा गया। उन लोगों के नाम सामने नहीं आए, बैंकों का पैसा जिनके खातों में गया। यह पैसा इससे पूर्व समाज कल्याण में खुले घोटाले की तरह भी सामने आ सकता है। बैंकों के खाते कई सफेदपोशों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
विधवा पेंशन घोटाले की परत-दर-परत लगातार खुलती जा रही है। घोटाला बड़े स्तर पर फैला मिला है। इस घोटाले में डाक विभाग, बैंकों के अधिकारी भी शामिल हैं। जो सबूत सामने आए हैं, इनसे यह स्पष्ट हो गया है कि घोटाला लंबे समय से चल रहा था।
घोटाले के बारे में विभागीय अधिकारियों को सब जानकारी थी। जांच टीम अभी तक केवल उन खातेदारों के नाम ही सामने लाने में सफल रही है, जिनके खाते में डाकघर से पैसा गया। अभी उन लोगों के नाम सामने नहीं आए हैं बैंक शाखाओं से जिन लोगों के खातों में पैसा गया।
सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में बनी कमेटी जब एक सप्ताह तक कोई रिजल्ट नहीं दे सकी तो डीएम को इस मामले को सीडीओ की निगरानी में देना पड़ा। सीडीओ ने जांच शुरू कराई तो कुछ ही घंटों में लाखों में सामने आया घोटाला करोड़ों में पहुंच गया। सुजडू पीएनबी मैनेजर ने जांच टीम का कोई सहयोग नहीं किया।
न ही सरकारी रिकार्ड टीम को दिया। घोटाले में संलिप्त इस बैंक शाखा के मैनेजर और कंप्यूटर ऑपरेटर भी नामजद हुए हैं। अब टीम उन लोगों के नाम सामने लाने में लगी है, बैंकों से जिन के खातों में विधवा पेंशन का पैसा गया है। विधवा पेंशन का पैसा 29 नोडल ब्रांचों में जाता था, जिनमें 28 बैंक और एक डाकघर था। अभी तक केवल डाकघर के सबूत ही मिल पाए हैं। बैंकों का रिकार्ड भी खंगाला जा रहा है। यदि इस पूरे मामले की गहराई से जांच हुई तो सफेदपोश भी इसमें सामने आ सकते हैं।
नियम विरुद्ध चल रहे थे खाते
ढाई वर्ष पूर्व शासन से यह आदेश आ गया था कि किसी भी अधिकारी के पदनाम का खाता बैंकों में नहीं रहेगा। एलडीएम के माध्यम से सभी बैंकों में डीएम की ओर से पत्र भी जारी हो गया था। बावजूद इसके अधिकारियों के पदनाम का खाता कैसे चलता रहा, यह भी बड़ा सवाल है। इससे यह भी साबित होता है कि बैंक और डाकघर कर्मियों की घोटाले में मिलीभगत है।