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गरीबों के बच्चों को कुपोषण तो अमीरों के बच्चों को मोटापे ने जकड़ा

Fri, 23 Jun 2017 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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Malnutrition child - फोटो : Getty Images
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जिले में बच्चे दो तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं। एकतरफ गरीब परिवारों के बच्चे पौष्टिक आहार नहीं मिलने से कुपोषण की बीमारी से जूझ रहे हैं। वहीं, अमीर परिवारों के बच्चे फास्ट फूड और जंक फूड खाने से मोटापे की बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। जिले में जीरो से पांच वर्ष के करीब तीन प्रतिशत बच्चे अतिकुपोषित हैं। करीब डेढ़ प्रतिशत बच्चे मोटापे की बीमारी का शिकार हैं। मोटापे की समस्या आठ से 18 साल के बच्चों में अधिक पाई गई है।  
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बाल विकास एवं पुष्टाहार के सर्वे के मुताबिक जिले में इस समय दो लाख 63 हजार 211 बच्चे हैं। बच्चों का वजन होने के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, उनमें कुपोषित बच्चों की संख्या 34,197 पाई गई है। यह संख्या दस प्रतिशत के लगभग है। इसमें भी अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 7,677 है। यह संख्या कुल बच्चों का लगभग तीन प्रतिशत है।

पुष्टाहार के बाद भी अतिकुपोषित बच्चों को जिला चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजा जाता है। यहां 14 दिन तक बच्चे और मां दोनों को पौष्टिक आहार दिया जाता है। बच्चों को डाइट के साथ खेल-खिलौने का सामान भी मिलता है। बच्चों की सभी जांच नि:शुल्क होती हैं और दवाई भी फ्री दी जाती है। 14 दिन बाद बच्चों को छुट्टी दी जाती है। हर 15 दिन बाद इन बच्चों का वजन किया जाता है।       
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अज्ञानता, अस्वच्छता बड़ी समस्या: डॉ आरती      
पोषण पुनर्वास केंद्र की प्रभारी डॉ आरती नंदनवार बताती हैं कि अब तक उनके पास 356 अति कुपोषित बच्चे उपचार के लिए आ चुके हैं। दस बेड की व्यवस्था है। कुछ बच्चे तो इतने कमजोर आते हैं कि उन्हें ब्लड चढ़ाना पड़ता है। डायरिया और सांस की बीमारी से पीड़ित बच्चे बड़ी संख्या में आते हैं।

कुछ तो ऐसी माताएं आती हैं, जिन्हें बच्चे को पकडने तक का ज्ञान नहीं। कम उम्र में शादी, अस्वच्छता और अज्ञानता कुपोषण का बड़ा कारण है। हम पौष्टिक आहार देने के साथ बच्चों की माताओं की काउंसलिंग भी करते हैं। हमारा स्टाफ यहां पूरा पारिवारिक माहौल देता है।       

फास्ट और जंक फूड सेहत के लिए जहर: डॉ जौहरी      
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ वीके जौहरी कहते हैं कि फास्ट फूड, जंक फूड और डिब्बा बंद जूस बच्चों के लिए जहर हैं। मैदे से बनने वाले सामान पेट के लिए खतरनाक है। चाऊमीन, पिज्जा, बर्गर, मोमोज, पेटीज से बच्चों को बचाएं। नमकीन, चिप्स, सभी प्रकार की कोल्डड्रिंक ट्रांजिट फेट बढ़ाने का काम कर रही हैं।

बच्चे शारीरिक मेहनत नहीं कर रहे हैं। टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल में बंध गए हैं। इस कारण स्थिति अधिक घातक हो गई है। अगर ऐसे बच्चों की दिनचर्या में शारीरिक व्यायाम शामिल नहीं होगा, तो 30 साल की आयु में वह डायबिटीज आदि बीमारी के शिकार हो जाते हैं। 40 से 42 के बीच हार्टअटैक की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।    

स्कूलों में मोटापा आ रहा सामने      
एसडी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य चंचल सक्सेना बताती हैं कि वह बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर हैं। सभी बच्चों का वजन कराया जाता है। लगभग डेढ़ प्रतिशत बच्चे मोटापे से और एक प्रतिशत बच्चे कुपोषण से ग्रस्त मिले हैं। जिन बच्चों में अधिक वजन है, उनमें सामान्य से बहुत ज्यादा है। बच्चों की सेहत को दृष्टिगत रखते हुए हमने लंच से पहले फ्रूट ब्रेक शुरू करा रखा है। कैंटीन में कोका कोला आदि नहीं रखने देते।      
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बच्चों में मोटापा रोकने के उपाय:      
- सप्ताह में एक दिन कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन न करें।      
- आलू-मटर की जगह आलू मेथी खाना फायदेमंद।
- प्रतिदिन सैर करें और शारीरिक व्यायाम करें।       
- एक दिन में 80 एमएल से ज्यादा सॉफ्ट ड्रिंक न पिएं।       
- तीस प्रतिशत से ज्यादा चीनी वाली मिठाई न खाएं।       
- सफेद चावल, मैदा, चीनी से परहेज करें।       
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