पाखंड के खिलाफ ऋषि ने जगाई वेदों की अलख
मुजफ्फरनगर। आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती के निर्वाण दिवस पर आयोजित यज्ञ एवं गोष्ठी में ऋषिवर की देशभक्ति, मानव निर्माण कार्यों का भावपूर्ण स्मरण किया गया। प्रज्ञाचक्षु वैदिक भजनोपदेशक उमेश आर्य को अंगवस्त्र एवं सम्मान राशि भेंट कर आचार्य गुरुदत्त आर्य ने सम्मानित किया।
वकील रोड स्थित आर्य समाज नई मंडी में महर्षि दयानंद के निर्वाण दिवस पर वेद मंत्रोच्चार से यज्ञ में आहुतियां देकर ऋषि को नमन किया गया। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद की प्रेरक ऊर्जा से मुल्क की आजादी में आर्य समाज की सबसे अहम भूमिका रही। वैदिक संस्कृति और संस्कारों की रक्षा के लिए संस्कार विधि तथा सत्यार्थ प्रकाश आदि ग्रंथों की रचना की। पाखंड, अंधविश्वास, ढोंग और कुरीतियों के उन्मूलन को वेदों को ओर लौटो का नारा दिया। चरित्र निर्माण को युवा पीढ़ी ऋषि के बताए मार्ग पर चलें। वैदिक चिंतक आर.पी. शर्मा ने कहा कि स्वामी जी ने नारी शिक्षा, हिंदी भाषा के प्रचार, गोरक्षा के लिए विशेष कार्य किए। विधवा विवाह को प्रोत्साहित कर बेटियों को गरिमा युक्त जीवन दिया। इंजीनियर कर्ण सिंह ने कहा कि महर्षि ने यज्ञ, योग, वैदिक शिक्षा और गुरुकुलों में जनसहभागिता का अभियान चलाया। आनंद पाल आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद की प्रेरणा से लाला लाजपत राय, सरदार भगत सिंह, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, स्वामी श्रद्धानंद ने स्वतंत्रता संग्राम में जीवन की आहुति दी। मंगत सिंह आर्य, सोमपाल सिंह आर्य, देवी सिंह सिंभालका, अतर सिंह, डॉ राजपाल सिंह, चौधरी सतीश आर्य, मदन लाल आर्य आदि ने विचार रखे। मंजू आर्य, प्रियंका आर्य, आमोद आर्य, सत्य प्रकाश बंसल, ईश्वर सिंह आर्य, शुभम आर्य आदि मौजूद रहे।