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शुकतीर्थ में तेंदुए के पदचिह्न मिलने से दहशत

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शुकतीर्थ में वन विभाग की पौधशाला में तेंदुए के पंजों के निशान। - फोटो : KHATAULI
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शुकतीर्थ में तेंदुए के पदचिह्न मिलने से दहशत
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। शुकतीर्थ में तेंदुए के पदचिह्न मिलने से संतों और ग्रामीणों में दहशत पसर गई। गंगा खादर के रेतीले टिल्लों के निकट खेती करने वाले ग्रामीण और मजदूरों ने काम करना बंद कर दिया है। वन विभाग के कर्मचारी भी वन क्षेत्र में चौकसी करने में लगे और ग्रामीणों को संभलकर रहने की सलाह देे रहे हैं।
शुकतीर्थ नगरी से सटे रेतीले टिल्लों पर वन विभाग शुकतीर्थ रेंज कार्यालय की पौधशाला बना रखी है, जिसमें अधिकारियों के दिशा निर्देशन में अनेकों प्रकार के पेड़ पौधे की नर्सरी तैयार की जाती है। वन क्षेत्राधिकारी राजसिंह पुंडीर ने बताया कि पौधशाला के इंचार्ज ऋषिपाल हैं। वन दरोगा शबी हैदर पर अपने वन क्षेत्र पर नजर रखकर कार्य कराने की जिम्मेदारी है। पौधशाला इंचार्ज ऋषिपाल ने बताया कि विगत सोमवार को प्रतिदिन की भांति पौधशाला पर माया, लक्ष्मी, कश्मीरी, रविंद्र आदि कर्मचारी कार्य करने के लिए नर्सरी के बीच पहुंचे, तो मौके पर तेंदुए के पंजे के निशान मिलने पर वे घबरा गए। मामला जानकारी में आने के बाद वन अधिकारियों को अवगत कराया गया। वहीं, नर्सरी पर कार्य करने वाले कर्मचारी काम करने को मना कर अपने घरों की ओर लौट गए। तेंदुए के पंजे के निशानों की सूचना मिलने पर शुक्रतीर्थ, बिहारगढ़, इलाहाबास के ग्रामीणों के बीच सनसनी फैल गई। वन विभाग कर्मी रेतीले टिल्लों के निकट खेतीबाड़ी करने और रास्तों से आने जाने वाले ग्रामीणों को चौकसी बरतने और सावधान रहने की सलाह देने के लिए लगे हुए हैं। आसपास के गांवों में रहने वाले ग्रामीणों को जागकर पहरा देने को कहा गया है।
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ग्रामीणों को अब संभलकर रहना होगा
भोपा, जौली, ककरौली, मोरना, भोकरहेड़ी सहित अब शुकतीर्थ के निकट तेंदुए के पंजों के निशानों को देखा जाना जंगली जानवरों को ग्रामीण आंचल के निकट आ जाने के कारण ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देना स्वाभाविक बात है। लगातार वन क्षेत्रों के जंगलों में खेतीबाड़ी और पेड़ों का अवैध कटान के कारण अब जंगली जानवरों ने गांवों की ओर रुख कर लिया है। पड़ोसी जिला बिजनौर में तो दर्जनों ग्रामीणों को तेंदुआ ने हमला कर मार डाला है। अगर यह सिलसिला शुकतीर्थ गंगा वन क्षेत्र से प्रारंभ होकर गांवों की ओर बढ़ गया, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी।
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श्रद्धालुओं की सुरक्षा का सवाल
शुकतीर्थ के रेतीले टिल्लों पर तेंदुए के पंजों के निशान मिलने ने संतों की नगरी के लिए वन विभाग की ओर सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी को और बढ़ा दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए वन कर्मियों को दिन रात कड़ी चौकसी रखनी होगी। धर्म नगरी में देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु पूजा अर्चना और भागवत कथाओं को सुनने और मनन करने के लिए आते हैं।
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