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रोहाना चीनी मिल के साथ जमीन के विनिमय का वाद निरस्त

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- साल 1990 में किसानों ने उप्र राज्य चीनी निगम के साथ की थी जमीन ट्रांसफर
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- मरघट की जमीन को लेकर चला आ रहा है पुराना विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। बहेड़ी गांव के कुछ किसानों और आईपीएल की रोहाना मिल के बीच जमीन के विनिमय (एक्सचेंज) का वाद एसडीएम सदर की कोर्ट से निरस्त कर दिया गया है। दो साल पहले अभियोजन की ओर से वाद दायर किया गया था।
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रोहाना क्षेत्र के बहेड़ी गांव की जमीन पर 1975 में अनुसूचित जाति के लोगों के पट्टे काटे गए थे। 19 जुलाई 1990 को किसान महेंद्र, राजकुमार, राजेंद्र, उदयवीर, मामचंद्र, हरदेवा ने अपनी जमीन के उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की मिल रोहाना के करीब होने के कारण परेशानी बताते हुए विनिमय की मांग की थी। जमीन का विनियम हो गया। बाद में चीनी मिल को आईपीएल ग्रुप ने ले लिया। प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब 23 नवंबर 2020 को तत्कालीन सहायक शासकीय अधिवक्ता राजस्व ने एसडीएम कोर्ट में वाद दायर कराया कि जमीन का विनिमय नहीं हो सकता। अभियोजन का कहना था कि जमीन ग्राम सभा की है और मरघट में दर्ज है। इस जमीन पर पट्टे भी नहीं किए जा सकते। सहायक शासकीय अधिवक्ता राजस्व प्रवीण कुमार ने बताया कि किसानों और मिल की ओर से जमीन के विनियम (एक्सचेंज) के लिए दायर किए गए वाद को एसडीएम सदर की कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। उधर, भाजपा नेता विपुल बहेड़ी का कहना है कि कानून की जीत हुई है। जमीन मरघट की है और उस पर पट्टे ही नहीं काटे जा सकते थे।
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