फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाकियू के पक्षधर है जनपद के खाप चौधरी

विज्ञापन
विज्ञापन
भाकियू के पक्षधर हैं जनपद के खाप चौधरी
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसानों के आंदोलन को लेकर खाप चौधरी बड़ौत और शामली में अलग-अलग धरना, प्रदर्शन कर रहे हैं। जिले के खाप चौधरी देश खाप के आंदोलन के पक्षधर नहीं हैं, वो भाकियू के समर्थन में हैं। इसलिए जिले के खाप चौधरियों ने बड़ौत के आंदोलन का समर्थन नहीं किया। देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह भी 17 दिसंबर को गाजीपुर में किसान आंदोलन को समर्थन देने गए खाप चौधरियों के साथ नहीं गए थे। इससे यह स्पष्ट हो गया कि देश खाप आज भी भाकियू के आंदोलन के पक्ष में नहीं है। वर्ष 1987 में देश खाप के तत्कालीन चौधरी सुखबीर सिंह ने अपने को भाकियू के किसान आंदोलन से अलग कर लिया था।
विज्ञापन

जिले के गांव सोरम में 14 दिसंबर को एतिहासिक चौपाल पर सर्वखाप की पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें खाप चौधरियों ने कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन करने का निर्णय लिया था। पंचायत में लिए गए निर्णय के तहत 17 दिसंबर को भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत के नेतृत्व में कई खाप के चौधरी किसानों के साथ दिल्ली में गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में शामिल हुए थे। नरेश टिकैत ने दिल्ली जाते हुए बड़ौत में देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह से भी मुलाकात की थी, मगर देश खाप ने इससे अपने को अलग रखा था। उसी दिन देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह ने 19 दिसंबर को बड़ौत में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे को जाम कर आंदोलन करने की घोषणा कर रखी थी, मगर जिले से इस आंदोलन में कोई भी खाप चौधरी शामिल नहीं हुआ। भाकियू अध्यक्ष एवं बालियान खाप के मुखिया चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन चल रहा है। दूसरे स्थान पर जाम और आंदोलन की कोई जरूरत नहीं थी। लाटियान खाप के चौधरी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि सर्वखाप की पंचायत में गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन को समर्थन करने का निर्णय लिया गया था, इसलिए वो बड़ौत के धरना, प्रदर्शन में नहीं गए। अहलावत खाप के चौधरी गजेंद्र अहलावत का कहना है कि वो भाकियू के आंदोलन के समर्थन में है। सर्व खाप मंत्री सुभाष बालियान ने कहा कि देश खाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह सोरम की पंचायत में भी नहीं आए थे। बड़ौत में किया गया आंदोलन देश खाप का अपना आंदोलन है। इसलिए अन्य खाप के चौधरी और किसान वहां नहीं गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें