भोपा। गांव धीराहेड़ी के ग्रामीण बाबा बिद्दी की 400 वर्ष पुरानी परंपरा के साथ ही होली का त्योहार मनाते हैं। होली पर बाबा की ओर से चलाई गई प्रसाद वितरण (कढ़ा प्रसाद) की परंपरा जारी है। बाबा के नाम पर घर-घर वह समूह के साथ प्रसाद बनाकर वितरण किया जाता है। इसके बाद ही होली के त्योहार की बाकी परंपराओं को पूरा किया जाता है। यहां 400 वर्ष पुराना कुआं मौजूद है।
भोपा क्षेत्र के गांव धीराहेड़ी के ग्राम प्रधान ऋषिपाल सिंह, युवा समाजसेवी पवन राठी, बिल्लू चेयरमैन, संजीव कुमार, पप्पू राठी आदि बताते हैं कि लगभग चार सौ वर्ष पहले बिद्दी बाबा अपने छोटे से परिवार के साथ इस गांव के एक सुनसान स्थान पर आकर ठहर गए थे। पास में ही एक कुआं था। वह उसी कुएं के पानी का इस्तमाल करते थे।
चार सौ वर्ष पुराना कुआं आज भी मौजूद है, जिसे ग्रामीण बाबा बिद्दी के कुएं के नाम से जानते हैं। नहर किनारे उनकी बैलगाड़ी खड़ी रहती थी। वह किसी भी त्योहार पर हलवा का प्रसाद बनाकर वितरण करते थे। धीरे धीरे उनका कुनबा बढ़ता गया। बताते हैं कि इस स्थान का नाम धीराहेड़ी पड़ गया था। ग्रामीण अपने आप को बाबा के वंशज का नाम देते हैं। उनके द्वारा चलाई गई कढ़ा प्रसाद वितरण की 400 वर्ष पुरानी परंपरा को ग्रामीण आज भी मनाते चले आ रहे हैं। कुछ लोग इस प्रसाद को समूह के रूप मे भी बनाकर बांटते हैं, जिसे कढ़ाह प्रसाद का नाम दिया गया है।