शुकतीर्थ कबीर साहब जयंती पर पुष्प अर्पित करते अनुयायी।
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शुकतीर्थ में श्रद्धा से मनाई कबीर जयंती
मोरना। तीर्थनगरी शुकतीर्थ के कबीर आश्रम में कबीर साहेब धर्मार्थ ट्रस्ट समिति के द्वारा सद्गुरु कबीर दास की 624वीं जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई।
राष्ट्रीय कोरी भुईयार हिंदू बुनकर समाज महासभा के अध्यक्ष बलराज सिंह ने कहा कि कबीर दास समाज को नई दिशा देने वाले संत थे। जुलाहा जाति से होने की उनमें कोई कुंठा नहीं थी, बल्कि वह स्वाभिमान से कहते हैं मैं काशी का एक जुलाहा, बूझहु मोर गियाना, अर्थात वह जाति-धर्म को नहीं, ज्ञान को ही सर्वोपरि मानते हैं। उन्होंने धर्मों में व्याप्त कुरीतियों के प्रति लोगों को सचेत किया। संत कबीर रामानंद के शिष्य थे। रामाननंद वैष्णव थे, लेकिन कबीर ने निर्गुण राम की उपासना की। कार्यक्रम में धनपाल सिंह ने कहा कि मध्यकाल के महान कवि कबीर दास की जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस मौके पर अनिल, अजमेर, नरेश, मदनपाल, जिले सिंह, इंद्रजीत, मांगेराम, किसन दास, ओमपाल , सुरेश चंद, आदेश, रत्न, अशोक आदि मौजूद रहे।