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जज रवि कुमार दिवाकर बोले-‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’, न्यायाधीशों को सॉफ्ट टारगेट बनाना आसान

Tue, 08 Sep 2026 01:11 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

मुजफ्फरनगर के फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर ने फैसले में न्यायाधीशों को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बताते हुए अपराधियों के बोलबाले और कमजोर सिस्टम पर चिंता जताई। उन्होंने लिखा- ‘वर्तमान में दान की नहीं, न्याय की जरूरत है।’
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अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुजफ्फरनगर अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने लिखा कि न्यायाधीशों को सॉफ्ट टारगेट बनाना आसान होता है। जब समाज में अपराधियों का बोलबाला हो जाता है तो जिसकी लाठी उसकी भैंस का नियम लागू होने लगता है। जब सिस्टम ईमानदारी से काम नहीं करता, तब गरीब आदमी परेशान होता है। वर्तमान में दान की नहीं न्याय की जरूरत है। न्याय के बिना स्वतंत्रता का कोई मोल नहीं रह जाता।

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फैसले में पिछले दिनों हुए घटनाक्रम की ओर इशारा करते हुए लिखा कि वर्तमान समय में मैं कुछ व्यवहार से बहुत आहत व दुखी हूं। अपने व्यक्तिगत विचार भी व्यक्त करने से अपने आपको नहीं रोक पा रहा हूं। जो व्यवहार उन्होंने मेरे साथ किया है, जब वह अपनी अंतरात्मा में झांकेंगे तो अपने आपको कभी माफ नहीं कर पाएंगे।
ऐसा व्यवहार करने का कारण माफियाओं/गैंगस्टरों/अपराधियों को बचाना है। ऐसा क्यों हुआ, इसकी संपूर्ण जानकारी मुझे है, लेकिन इस वक्त बोलना ठीक नहीं होगा, क्योंकि पद की भी मर्यादा होती है।
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महाभारत में यक्ष के धर्मराज से पूछे गए संसार के सबसे बड़े आश्चर्य को भी लिखा, जिसमें कहा गया कि इंसान को पता है कि एक दिन मर जाना है लेकिन वह फिर भी ना मरने की कामना करता है। 

कार्यरत न्यायिक अधिकारियों की हत्याएं
केस-1 : 20 मार्च 1982 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर प्रसाद सिंह और उनके पंद्रह वर्षीय बेटे अजीत प्रताप सिंह की हत्या चित्रकूट में कर दी गई थी।
केस-2 : 27 जनवरी 2001 को तत्कालीन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लखीमपुर खीरी बालक राम की हत्या, जिसमें तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
केस-3 : 28 जुलाई 2021 को मार्निंग वॉक के दौरान धनबाद में एडीजे उत्तम आनंद की हत्या की गई, जिसमें दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा हुई।

कोर्ट में विक्की की हत्या...बेखौफ थे अपराधी
अभियोजन ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब मुजफ्फरनगर में अपराधियों को कानून का डर नहीं था। न्यायालय में भी अपराधी मुकदमे को अनावश्यक रूप से विलंबित कराते थे। शौकीन गैंग का आतंक रहा। 16 फरवरी 2015 को कोर्ट के अंदर सुनवाई के दौरान वकील की वेश में आए हमलावर ने विक्की त्यागी की हत्या कर दी थी। अपराधी बेखौफ थे और उन्हें कानून व अदालत का कोई भी डर नहीं था।

मुझे और परिवार को खतरा...बरेली से कम कर दी गई सुरक्षा
 जज रवि कुमार दिवाकर ने चित्रकूट में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के प्रकरण की सुनवाई की। 10 अक्तूबर 2025 को डकैत ठोकिया के मामले में फैसला सुनाया। केस में छठा गवाह वारिजा लाल कया बयान सात अक्तूबर 2013 को अंकित किया गया लेकिन सातवां गवाह 19 सितंबर 2024 को यानी 11 साल बाद अदालत पहुंचा। गैंग के आतंक के कारण सुनवाई में विलंब हुआ। स्पष्ट होता है कि माफिया लोक सेवक में किस तरह डर का माहौल पैदा करते हैं।

बरेली में मौलाना तौकीर रजा को 2010 के दंगे का मास्टरमाइंड मानते हुए तलब किया। बनारस में ज्ञानवापी केस सुना, जिसके बाद परिवार को धमकी मिली। आठ जून 2022 को प्राथमिकी दर्ज हुई। आतंकी अदनान खान ने धमकी दी।

जज ने लिखा कि धर्म विशेष के लोगों का ब्रेन वॉश कर मेरे और मेरे परिवार की हत्या के लिए दुष्प्रेरित किया जा रहा है। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने मेरी सुरक्षा को बरेली की अपेक्षा कम कर दिया है। पुलिस अधिकारियों को लगता है कि वह सुरक्षा देकर कोई एहसान कर रहे हैं।
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यहां दंगा हुआ...बुलानी पड़ी फौज
अभियोजन पक्ष ने अदालत में पुराने दौर की क्राइम कैपिटल की छवि को रखा। 2013 का दंगा और फौज को बुलाने का हवाला दिया गया। शौकीन गैंग ने खादर में चंबल के बीहड़ जैसा आतंक खड़ा कर दिया था। फिल्म या वेबसीरीज समाज का आईना होती है, भौकाल एवं भौकाल-2 वेबसीरीज से जिले के अपराध को समझा जा सकता है।
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