फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंतरिम जमानत खारिज, जेल भेजे गए सर्राफा बंधु अजय और आशुतोष स्वरूप

विज्ञापन
विज्ञापन
सवा तीन साल पहले रेल के सामने कूदकर आत्महत्या के मामले में कसा कानूनी शिकंजा
विज्ञापन

जिला जज ने नियमित जमानत के लिए तय की 22 नवंबर
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रुपये के लेन-देन को लेकर सवा तीन साल पहले रेल के सामने कूदकर आत्महत्या के मामले में आरोपी सराफा कारोबारी बंधु अजय स्वरूप बंसल और आशुतोष बंसल पर कानूनी शिकंजा कस गया है। जिला जज चवन प्रकाश ने दोनों भाइयों की अंतरिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। दोनों भाइयों को जेल भेज दिया गया। नियमित जमानत पर सुनवाई की तिथि 22 नवंबर की तिथि तय की गई है।
शहर के भगत सिंह रोड पर अजय स्वरूप बंसल और आशुतोष बंसल का प्रतिष्ठित जवेलरी शोरूम है। जुलाई 2019 में थाना नई मंडी में रामलीला टील्ला निवासी राजेश ने रेलवे लाइन पर ट्रेन के सामने कूदकर जीवन लीला समाप्त कर ली थी। मृतक के भाई चमन सिंह ने रुपये के लेन-देन के विवाद में दोनों सराफा कारोबारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा थाना नई मंडी में कायम कराया था। मामले में थाना पुलिस ने पहले अंतिम रिपोर्ट (एफआर ) लगा दी। मगर, मामले में पुन: अग्रिम विवेचना हुई तो पुलिस ने दोनों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
विज्ञापन

इसके बाद आरोपी हाईकोर्ट पहुंचें, लेकिन उनकी जमानत नहीं हो सकी। आरोपियों ने अधिवक्ता के माध्यम से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अंतरिम जमानत पाने के लिए समर्पण किया। निचली अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र खारिज होने के बाद जिला जज की अदालत में अर्जी लगाई गई। जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बताया जिला सत्र न्यायाधीश चवन प्रकाश ने मामले में तत्काल सुनने से इन्कार कर दिया। अगली तिथि 22 नवबंर नियत कर दी। इसके बाद पुलिस ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
विज्ञापन

यह था पूरा मामला
शहर के कोतवाली क्षेत्र के रामलीला टिल्ला निवासी राजेश कुमार ने 10 जुलाई 2019 को सुबह रेल के सामने कूद कर आत्महत्या कर ली थी। शव के पास बरामद सुसाइड नोट में मृतक ने शहर के अजय स्वरूप बंसल और आशुतोष बंसल पर आरोप लगाए थे। वादी चमन सिंह ने बताया था कि उसके भाई राजेश (मृतक) ने जनवरी वर्ष 2019 में सदर बाजार में आरोपियों से एक दुकान के किराए (पगड़ी) के लिए सौदा किया था। तय रकम 6.55 लाख रुपये दो किस्तों में चुकाने के बाद भी उसे दुकान पर कब्जा नहीं दिया और ना ही रकम लौटाई। आरोपियों के उत्पीड़न से तंग आकर उसने जीवन लीला खत्म की थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें