अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। जिले की हवा की गुणवत्ता लगातार तीसरे दिन भी बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई। वायु गुणवत्ता सूचकांक में जरूरत सुधार हुआ, लेकिन अभी भी हवा सांस लेने लायक नहीं है। अगर हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो सांस के रोगियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती है।
रविवार को सुबह और शाम के समय स्मॉग का असर नजर आया। दिन के समय आसमान में बादल आते-जाते रहे। जिससे दिनभर मौसम धुंधला बना रहा। एक्यूआई के स्तर में सुधार जरूर हुआ, लेकिन अभी भी हवा की गुणवत्ता सही नहीं है। शाम चार बजे एक्यूआई 228 रिकॉर्ड किया गया, जबकि इसके बाद करीब सात बजे फिर से 237 पर पहुंच गया। सांस के रोगियों के लिए हवा की गुणवत्ता को सही नहीं माना जा सकता। सांस और नेत्र रोगियों के लिए खराब हवा मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
मुजफ्फरनगर की हवा का हाल
तिथि एक्यूआई
04 नवंबर 342
05 नवंबर 332
06 नवंबर 228
राहत के लिए छिड़कवाया पानी
प्रदूषण से राहत के लिए प्रदूषण विभाग की ओर से शहर के मुख्य मार्गों पर पानी का छिडक़ाव भी कराया गया। भोपा रोड पर अलग-अलग जगह विभाग की टीम ने पानी की बौछार की।
मॉस्क का प्रयोग करना चाहिए
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. रविंद्र सिंह का कहना है कि ऐसे मौसम में मॉस्क और चश्मे का प्रयोग करना चाहिए। मॉस्क लगाना सांस के रोगियों के लिए बेहद जरूरी है। इससे रोकथाम होगी। इसके अलावा मौसम साफ होने तक खुली हवा में सैर करने से परहेज करना चाहिए।
हवा खराब होते ही भेजे जा रहे नोटिस
हवा की गुणवत्ता खराब होते ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जिले में उद्योगों को नोटिस भेजने शुरू कर दिए हैं। यही नहीं अब तक कई उद्योग बंद कराए जा चुके हैं।
क्या है खराब हवा की वजह
जिले में मुख्य मार्गों पर चल रहे निर्माण कार्य, खुली पड़ी निर्माण सामग्री, सड़कों पर बढ़ते वाहन और नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे उद्योगों से लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। पेड़ों का कटान होने से भी मुश्किलें खड़ी हो रही है।