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Muzaffarnagar News: बिना गुरू कैसे मिले ज्ञान, राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों का अभाव

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- जिले के राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के तीन सौ से अधिक खाली पद
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- राजकीय इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर के अलावा किसी भी विद्यालय में नहीं है स्थायी प्रधानाचार्य

संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। भले ही पढ़ाई को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा तमाम अभियान चलाए जा रहे हो, लेकिन शिक्षकों के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। राजकीय विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी है। राजकीय स्कूलों में करीब तीन सौ शिक्षकों की कमी है।
शिक्षकों के अभाव में जिले के राजकीय विद्यालयों में शैक्षणिक स्तर नीचे गिरता जा रहा है। आलम यह है कि किसी-किसी विद्यालय में एक या दो ही शिक्षक है, जो पूरे विद्यालय को चला रहे है। इतना ही नहीं, राजकीय इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर के अलावा किसी भी विद्यालय में स्थायी प्रधानाचार्य ही नहीं है। जिले के सभी राजकीय इंटर कॉलेज में 153 प्रवक्ता, 21 स्थायी प्रधानाचार्य और 112 सहायक अध्यापकों की जरूरत है। यह सभी पद खाली चल रहे हैं। बात अगर राजकीय हाई स्कूलों की करें तो यहां भी एक प्रधानाध्यापक और 63 सहायक अध्यापकों के पद रिक्त है। फिलहाल राजकीय इंटर कॉलेजों में 62 सहायक अध्यापक, 54 अध्यापक और दो प्रधानाचार्य हैं। यह दोनों भी केवल राजकीय इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर में तैनात है। वहीं, राजकीय हाईस्कूल में केवल 57 सहायक अध्यापक है।
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42 विद्यालय और 175 शिक्षक
जिले में 22 राजकीय इंटर और 20 राजकीय हाईस्कूल है। इन सभी में कुल 175 शिक्षक हैं। यानी 42 विद्यालयों में केवल 175 ही शिक्षक है, अभी 350 शिक्षकों की जरूरत है। इनमें सहायक अध्यापक, अध्यापक, प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य की जरूरत हैं।

राजकीय इंटर कॉलेजों में नहीं प्रधानाचार्य
जिले के केवल एक विद्यालय को छोड़कर बाकी 21 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य ही नहीं है। राजकीय इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर में ही केवल प्रधानाचार्य की तैनाती है। अन्य विद्यालयों में एक भी स्थायी प्रधानाचार्य नहीं है।
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वर्जन-
राजकीय विद्यालयों में चार सौ से अधिक शिक्षकों की कमी
जिले में शिक्षकों की कमी है। शासन को हर माह की रिपोर्ट भेजी जाती है। फिलहाल प्राइवेट शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है। विषय के हिसाब से शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है।
- गजेंद्र कुमार, डीआईओएस
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