मुशायरे में अतिथियों का स्वागत करते जहान-ए-अदब संस्था के पदाधिकारी
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देवबंद (सहारनपुर)। साहित्यिक व सामाजिक संस्था जहान-ए-अदब एकेडमी की ओर से हिंदी दिवस पर मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने उम्दा कलाम पेश कर श्रोताओं की जमकर दाद बटोरी।
सोमवार की रात्रि मोहल्ला बेरून कोटला स्थित उर्दू घर में आयोजित मुशायरे में शायर शमीम किरतपुरी ने पढ़ा..हिंदी और उर्दू भाषा का कैसा सुंदर मेल, उर्दू जिस दीपक की बाती हिंदी उसका तेल। तनवीर अजमल ने कहा..हिंदी दिवस को आज मनाने के वास्ते, उर्दू जुबां के चाहने वाले भी आ गए। डा. शमीम देवबंदी ने हिंदी के प्रति अपनी भावना प्रकट करते हुए पढ़ा..इसकी कद्र न जानी अपने ही देश में, हिंदी है बेगानी अपने ही देश में। गुलजार बेग जिगर ने कहा..है फूल भी हमारे खुश्बू भी हमारी है, हिंदी भी हमारी है उर्दू भी हमारी है। अदनान अनवर ने कुछ यूं कहा..उठे किसी के दर्द तो पकडूं जिगर को मैं, अल्लाह कैसा तूने मेरा दिल बना दिया। सुहैल देवबंदी ने पढ़ा..घर जरा सी बात सिर पर उठा लेते हैं लोग, मां अगर कुछ भी कहे तो मुंह बना लेते हैं लोग सुनाकर श्रोताओं की जमकर वाहवाही लूटी। इनके अलावा नूर हसन नूर, डॉ. सादिक, सलीम तन्हा, नफीस अहमद, सरवर उस्मानी और फैसल देवबंदी ने भी अपना कलाम पेश किया। अध्यक्षता शमीम किरतपुरी व संचालन गुलजार बेग ने किया। कार्यक्रम में शायर गुलजार बेग व फैसल उस्मानी को जहान ए अदब का सदस्य बनाए जाने पर हर्ष व्यक्त किया गया। इस मौके पर सामाजिक संस्था नजर के अध्यक्ष नजम उस्मानी, नदीम कुरैशी, दानियाल, असद गौड़, रिहान कुरैशी और अफजल गौड़ आदि मौजूद रहे।