देवबंद। कर्नाटक में हुए हिजाब प्रकरण की गूंज यूपी चुनाव में जोरशोर के साथ सुनाई दे रही है। यह मामला अभी ठंडा पड़ता हुआ भी नहीं दिख रहा है। इसको लेकर जिस तरह की बहस छिड़ी उससे कहीं न कहीं नफरत का माहौल भी बना है। हालांकि इस पर उलमा का दो टूक कहना है कि यह कोई बहस का मुद्दा नहीं है। क्योंकि इस्लाम धर्म में हिजाब को जरूरी बताया गया है। साथ ही संविधान भी अपने अपने मजहब के अनुसार जिंदगी जीने का पूरा अधिकार देता है। मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि हिजाब का विरोध करना सरासर गलत है। क्योंकि मुझे नहीं लगता है कि हिजाब को किसी से पेशानी होती है। कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। जिसमें सभी को अपने धर्म के अनुसार जिंदगी जीने का पूरा पूरा अधिकार मिला हुआ है। ऐसे में हिजाब को लेकर हंगामा करना और इसे मुद्दा बनाना यह एक सियासी साजिश है। दारुल उलूम फारुकिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी का कहना है कि हिजाब मामले को धार्मिक रंग देने वालों को यह लग रहा होगा कि इससे लाभ पहुंचेगा। लेकिन ऐसा नहीं है। अब जनता जागरूक हो चुकी है और रानीतिक दलों के बहकावे में आने वाली नहीं है। उन्होंने लोगों से विकास, रोजगार और सुरक्षा के मुद्दे पर वोट की चोट करने की अपील भी की है।