स्वास्थ्य विभाग में मरीजों को चिकित्सकीय परीक्षण के बाद मिलने वाली टैबलेट, कैप्सूल के साथ अब रोगों की काट के लिए हर्बल गार्डन का सहारा लिया जाएगा। मरीज के भीतर पनप रहे रोगों को खत्म करने के लिए मेडिसिन गुण वाले पौधों की मदद ली जाएगी। इसके लिए जिला महिला-पुरुष अस्पताल समेत तीन सीएचसी और पीएचसी पर हर्बल गार्डन तैयार किए गए हैं।
जून और जुलाई में आमतौर पर कई बीमारियां पैर पसारती हैं। जुलाई में मच्छरों के प्रकोप से डेंगू, मलेरिया के साथ वायरल फीवर आदि का प्रकोप बढ़ता है। इनके साथ ही जलजनित बीमारियां भी लोगों में होती हैं। जिससे हाथ-पैर के साथ त्वचा रोग पनपते हैं।
बुखार, खांसी और जुकाम समेत अन्य बीमारियों में स्वास्थ्य विभाग रोगियों का इलाज अपने हर्बल गार्डन से भी करेगा। हर्बल गार्डन में मेडिसिन गुणों वाले पौधों को उगाया जा रहा है। जिला महिला एवं पुरुष अस्पताल में हर्बल गार्डन तैयार कर वहां मेडिसिन पौधों को उगाया गया है। इसके साथ ही सीएचसी खतौली, जानसठ और पुरकाजी में हर्बल गार्डन तैयार कर दिए गए हैं।
हर्बल गार्डन को तैयार करने में विभाग को करीब तीन से चार माह का समय लगा है। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि अस्पतालों को हरा-भरा बनाने के साथ हर्बल गार्डन में मेडिसिन पौधे लगाए गए हैं। यह बेहतर प्रयास है कि कुछ पौधे उपचार में सहयोगी हैं।
रोगियों के लिए करेंगे इस्तेमाल
जिला चिकित्सालय के साथ सीएचसी-पीएचसी पर हर्बल गार्डन में लोंग, तुलसी, एलोवेरा, दालचीनी, इलायची, मेंहदी, अशोक वृक्ष, कढ़ी पत्ता, हींग, गिलोय की बेल समेत अनेक मेडिसिन पौधों को उगाया गया है। जिनका जरूरत पड़ने पर चिकित्सक रोगियों का इलाज करने के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे।
सजावट के लिए लगेंगे फूल, प्रवेश प्रतिबंधित
हर्बल गार्डन को विभागों में इस तरह से बनाया जाएगा कि वह चारों ओर से बंद रहेंगे। गार्डन में सवाजट के लिए फूल-पत्ती और भीतर के हिस्से में मेडिसिन पौधे लगाए गए हैं। यहां कर्मचारियों को भी देखभाल के लिए रखा जाएगा। अस्पताल में आने वाले आम लोगों, मरीजों के तीमारदारों के लिए गार्डन में प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया है, ताकि पौधों को कोई नुकसान पहुंच सके।