मुजफ्फरनगर। आंदोलनकारियों पर फर्जी तरीके से हथियार बरामदगी दर्शाने के मामले में बचाव पक्ष ने कोर्ट में बहस की। बचाओ पक्षी की ओर से न्यायालय में तर्क दिया गया कि सरकारी कर्मचारी पर मुकदमा चलाने की दी गई अनुमति वैध नहीं है। सुनवाई के बाद न्यायालय ने 23 सितंबर की तिथि नियत की है। एक अक्तूबर 1994 की रात पृथक राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे उत्तराखंड के आंदोलनकारियों को छपार थाना क्षेत्र के रामपुर तिराहा पर रोक लिया गया था। आरोप है कि पुलिस फायरिंग में सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी, जबकि महिलाओं से छेड़छाड़ और दुष्कर्म के आरोप लगे थे। इस मामले में सीबीआइ की तरफ से हाई कोर्ट के आदेश पर सात मुकदमे दर्ज कराए गए थे। बुधवार को सीबीआई बनाम ब्रजकिशोर एवं एसपी मिश्रा प्रकरण में सुनवाई की गई।