कुरजां के बारे में ये भी जानें
- लंबे सफर के दौरान यह पांच से आठ किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ता है।
- मौसम में बदलाव होते ही सबसे ज्यादा यह पक्षी राजस्थान में पहुंचते हैं।
- राजस्थान के लोकगीतों में कुरजां को विशेष स्थान मिला है।
- उड़ान के दौरान यह पक्षी कभी भी रास्ता नहीं भटकते और समय पर पहुंचते हैं।
मुखिया तय करता है कुरजां का प्रवास
कुरजां पक्षियों के झुंड में एक मुखिया पक्षी होता है। आसमान से धरती पर झुंड का उतरना मुखिया तय करता है। पहले खुद मुखिया धरती पर उतरकर यह तय करता है कि कोई खतरा नहीं है। इसके बाद बाकी पक्षी नीचे उतरकर दाना चुगते हैं।
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आज हैदरपुर में होगी पक्षियों की गणना
शनिवार यानी आज पक्षियों की गणना के लिए दुनियाभर में ग्लोबल-डे मनाया गया। पक्षी विशेषज्ञ आशीष लोया ने बताया कि सुबह आठ से पूर्वाह्न 11 बजे के बीच हैदरपुर में भी पक्षियों की गिनती की गई। यहां आने वाले पर्यटकों और पक्षियों के विषय में जानने की चाह रखने वाले लोगों को बर्ड वॉचिंग सिखाई गई।