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डॉक्टरो की कमी से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग

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स्वामी कल्याण देव राजकीय जिला चिकित्सालय। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग
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मुजफ्फरनगर। वैश्विक महामारी का कारण बने कोरोना के प्रकोप के बीच भी यहां स्वास्थ्य विभाग डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जिले में तेजी से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। ऐसे में डॉक्टरों की अधिक जरुरत है, मगर जिले में चिकित्सक काफी कम हैं। जिला चिकित्सालय में नेत्र और चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं है। उधर, देहात में पीएचसी और सीएचसी पर भी स्वीकृत पदों से काफी कम डॉक्टर हैं। हालातों का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि जिलेभर में 73 सरकारी डॉक्टरों को प्रतिदिन करीब दस हजार मरीज देखने पड़ते हैं।
जनपद में जिला चिकित्सालय, महिला जिला चिकित्सालय के अलावा 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 42 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। स्वास्थ्य विभाग के मानक के अनुरूप इन सभी अस्पतालों में डॉक्टरों के स्वीकृत पद 156 हैं, मगर जिले में 73 डॉक्टर ही अस्पतालों में प्रतिदिन करीब दस हजार मरीजों को देखते हैं। इनमें से कुछ डॉक्टरों के पास दो-दो पीएचसी का प्रभार है। रामराज पीएचसी के प्रभारी डॉ. रामफल सिंह तीन दिन रामराज और तीन दिन मीरापुर पीएचसी पर ओपीडी करते हैं। सिसौली और बघरा सीएचसी पर डॉक्टर नहीं है। स्वीकृत पदों के हिसाब से 83 डॉक्टरों की कमी स्वास्थ्य विभाग में चल रही है।
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जिला चिकित्सालय में नेत्र विभाग अलग से है, मगर यहां पर कोई नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं है। चर्म रोग विशेषज्ञ भी यहां नहीं है। हाल में आयोजित मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेलों में सबसे अधिक चर्म रोगी आए हैं, बावजूद इसके जिला चिकित्सालय में चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर भी नहीं है।
ये हैं सुविधाएं
मुजफ्फरनगर। स्वामी कल्याणदेव राजकीय जिला चिकित्सालय में ब्लड बैंक, सीटी स्कैन, डायलेसिस, हेपेटाइटिस बी-सी की जांच, अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, ऑपेरशन, बेबी आईसीयू की सुविधा है। मगर रंगीन अल्ट्रासाउड यहां नहीं होता।
बर्न यूनिट नहीं, मेरठ रेफर होते हैं मरीज
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में बर्न यूनिट नहीं है। जिस कारण जले हुए लोगों का यहां उपचार नहीं होता। उन्हें यहां से मेरठ रेफर किया जाता है। न ही बर्न स्पेशलिस्ट है।
रोहाना सीएचसी का बजट आया
मुजफ्फरनगर। कोरोना काल के चलते गत 2020 में यहां स्वास्थ्य विभाग को कोई बजट नहीं मिला। इस बार केवल रोहाना में सीएचसी बनाने का बजट आया है। 7.68 करोड़ में बनने वाली सीएचसी के लिए अभी केवल 50 लाख रुपये ही आए हैं।
कोरोना ड्यूटी के लिए स्टाफ नियुक्त
मुजफ्फरनगर। कोरोना का संक्रमण बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग ने तीन माह के लिए संविदा का स्टाफ नियुक्त किया है। इसमे 12 डॉक्टर, 18 स्टाफ नर्स, तीन फार्मेसिस्ट, दस वार्ड ब्वॉय, दस स्वीपर, 12 कम्प्यूटर ऑपरेटर और 12 लैब असिस्टेंट रखे गए है, जो केवल कोविड का कार्य देखेंगे।
इन्होंने कहा....
जिले में डॉक्टरों की भारी कमी है। स्वीकृत पदों के अनुसार 83 डॉक्टर और चाहिए। इसके लिए शासन को लिखा गया है। 73 डॉक्टर ही अस्पताल में हैं। जो कोरोना काल में भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। दवाइयों की उपलब्धता काफी है।
डॉ. एसके अग्रवाल, सीएमओ
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भोपा सीएचसी का हाल
(फोटो)
भोपा। सीएचसी पिछले काफी समय से समस्याओं से जूझ रहा है, जिसके चलते यहां डॉक्टर हैं तो उपकरण नहीं और उपकरण हैं तो उनसे संबंधित कर्मचारी नहीं है। सीएचसी पर एक्स-रे टेक्नीशियन की तैनाती है, लेकिन एक्स-रे मशीन नहीं हैं। यहां जच्चा-बच्चा स्पेशलिस्ट महिला डॉक्टर भी नहीं है। यहां स्टाफ नर्स के माध्यम से नॉर्मल डिलीवरी की जाती है। यहां दांतों के डॉक्टर की तैनाती तो की गई है लेकिन संबंधित उपकरण नहीं है। जनरेटर भी खराब पड़ा है।
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वीरान पड़ा मातृ-शिशु कल्याण केंद्र
(फोटो )
रतनपुरी। लाखों रुपये की लागत से बना रतनपुरी का मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र (जच्चा-बच्चा केंद्र) पूर्णतया जर्जर हालत में है। अप्रैल 2015 में यह बना था। यहां तैनात एएनएम उषा देवी ने कहना है कि केंद्र के कूड़ा कचरा डाला जाता है। जिस कारण यहां जच्चा व बच्चा दोनों के लिए सुरक्षित वातावरण नहीं है। इसलिए वह फिलहाल आंगनबाड़ी केंद्र पर बैठकर टीकाकरण व अन्य स्वास्थ्य सेवा संबंधी कार्य पूर्ण करती हैं।
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